आमजन का हमदर्द था बागी सुल्ताना
ओपन डोर के बागी सुलताना विशेषांक का लोकार्पण

नजीबाबाद: एक शाम बागी सुलताना के नाम आयोजन में ऐतिहासिक चरित्र सुलताना डाकू के जीवन पर चर्चा करते हुए ओपन डोर के बागी सुलताना विशेषांक का लोकार्पण बुद्ध संस्कृति विश्वविद्यापीठ के सभागार में किया गया।
अतिथियों द्वारा गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ आरंभ कार्यक्रम में सबसे पहले ओपन डोर के संपादक अमन कुमार त्यागी ने सुलताना के जीवन पर प्रकाश डाला और उसे अंग्रेजी शासकों के विरुद्ध बागी बताते हुए आमजन का हमदर्द बताया।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार डॉ. पंकज भारद्वाज ने कहा कि सुलताना के जीवन पर शोधकार्य होना चाहिए। वह केवल उन्हीं लोगों को लूटता था जो अंग्रेजी सरकार के पिट्ठू थे। देश विदेश में सुलताना का नाम पहचाना जाता है और बिजनौर नजीबाबाद की पहचान उसी के नाम से होती है।
मुख्य अतिथि डॉ.अनिल शर्मा ‘अनिल’ ने कहा कि सुलताना ने तत्कालीन शासन का विरोध धर्मान्तरण कराने और ईसाईयत को बढ़ावा देने की वजह से किया। सौ बरसों के बाद आज भी जिसका चर्चा होता है, सुलताना हो लाख बुरा पर भारत मां का प्यारा था।
विशिष्ट अतिथि डॉ.भूपेन्द्र कुमार ने कहा कि सुलताना महिलाओं की इज्ज़त करता था, मां बहन बेटियों की इज्जत की रक्षा की जीवन में उसने, बहुतों की शादी में धन दे कितनों को दिया सहारा था।
मुख्य अतिथि डॉ इलियास ने सुल्ताना पर ग़ज़ल प्रस्तुत की जबकि नागेन्द्र मधुकर ने एक कविता और ग़ज़ल प्रस्तुत की
संयोजक संचालक कुमार मोनू रुबा ने सुलताना के जीवन पर बेहतरीन रचना सुनाते हुए कहा कि सुलताना बागी था लेकिन लाखों ऑंख का तारा था।
मोनू रुबा के इसी मिसरे पर
रचनाकारों ने रचनाएं प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में कारी शाकिर, डॉ आफताब नोमानी ने भी सुल्ताना पर केंद्रित काव्यपाठ किया जबकि सुधीर राणा, दारा सिंह तोमर, आलोक त्यागी, गोविंद सिंह बौद्ध, राकेश मोहन भारती, बब्बन जैदी आदि वक्ताओं ने सुल्ताना के व्यक्तित्व पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के पश्चात गोविंद सिंह बौद्ध ने सभी को अल्पाहार कराकर अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के पश्चात बाहर से आए अतिथियों को वह किला भी दिखाया गया जिसमें सुल्ताना अपने साथियों के साथ रहा था।
(प्रस्तुति: अमन त्यागी)



