कवियों ने गीत-ग़ज़लों से महफ़िल को किया सराबोर
‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था की ऑनलाइन काव्य संध्या आयोजित

देहरादून: ‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था की गुरुवार को आयोजित ऑनलाइन काव्य संध्या में कवियों ने गीत-ग़ज़लों से महफ़िल को सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की संयोजक श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ जी ने अपनी मधुर वाणी में माँ शारदा की वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को श्रद्धा, सौंदर्य और पवित्रता से भर दिया।
कार्यक्रम का संचालन संस्था की महामंत्री डॉ. भारती मिश्रा ने अत्यंत विधिवत, गरिमापूर्ण एवं सौम्य ढंग से किया, जबकि संस्था की अध्यक्ष कविता बिष्ट ‘नेह’ जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
काव्य संध्या में अनेक सुप्रसिद्ध कवि एवं रचनाकारों ने अपनी सृजनशील रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। ज्वाइंट कमिश्नर जीएसटी काशीपुर श्याम तिरुआ ने “दिल पर घाव कुछ गहरा लगा” ग़ज़ल प्रस्तुत कर माहौल को सरस और भावपूर्ण बना दिया। अमित शुक्ला ने “वक़्त से जो लम्हा चुराकर दे दे कोई आज लाकर” ग़ज़ल सुनाकर खूब तालियाँ बटोरीं। मणि अग्रवाल ‘मणिका’ जी ने “दिल के टाँके खोल सभी हम अंदर तक का दिखलाते…” सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कविता बिष्ट ‘नेह’ ने “बादल गरजा, टूटा पर्वत” जैसी प्रभावशाली पंक्तियों से वाहवाही लूटी। कुमार विजय द्रोणी जी ने और “तन का रोना सब सुनते हैं…” की प्रस्तुति पर श्रोताओं ने खूब तालियाँ बजाईं।
डॉ. भारती मिश्रा की रचना “मैं समय की बेटी हूं, संघर्ष मेरा श्रृंगार है” ने समस्त दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। संगीता वर्मानी ‘साध्या’ जी ने “ज़िंदगी की दौड़ में हम बहुत आगे निकल आए” सुनाकर प्रभावित किया। रेखा जोशी जी ने “दीप की लौ जलती रही रात भर…” सुनाकर वाहवाही लूटी। निकी पुष्कर जी की प्रस्तुति “कहीं भी कोई मुझे उस एक शख़्स-सा न लगे…” मंत्रमुग्ध कर देने वाली रही। नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’ जी की पंक्तियाँ “धूप की थाली में बचपन रखा था…” श्रोताओं के मन में उतर गईं। स्वाति ‘मौलश्री’ ने “उधार-सा मिला मुझे यह सुकून किसका है” सुनाकर तालियाँ बटोरीं। शोभा पराशर ने-“ये सुगन्धित पवन कर दे मन को मगन” सुंदर रचना मधुर स्वर में सुनाकर सभी को आनंदित किया। भव्यता कुश जी ने “जीवन चलता जाएगा…” सुनाकर जीवन-दर्शन का सुंदर चित्र खींचा। काव्य संध्या में हास्य, व्यंग्य, ओज, श्रृंगार और करुण सभी रसों की धारा बहती रही।
अतिथियों के उद्बोधन से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हुआ। मुख्य अतिथि श्याम तिरुआ जी और विशिष्ठ अतिथि अमित शुक्ला जी ने अपने उद्बोधन में संस्था के साहित्यिक कार्यों की सराहना करते हुए सभी रचनाकारों की साधना को नमन किया। उन्होंने कहा कि “आज ‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था की काव्य संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में आना मेरे लिए सौभाग्य का विषय है।”
संस्थापिका एवं अध्यक्ष कविता बिष्ट ‘नेह’ जी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि “सभी साहित्यकार इस पुण्यमय धारा को निरंतर बहाते रहें, जहाँ शब्द संस्कार बनें, विचार शक्ति बनें और साहित्य समाज का पथ–प्रदीप बने।” उन्होंने सभी का हृदयपूर्वक धन्यवाद किया और प्रेरक आशीर्वचन के साथ गोष्ठी को पूर्णता प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में महामंत्री डॉ. भारती मिश्रा ने सभी अतिथियों, कवियों और सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।



