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शहीदों की शहादत को कभी बदनाम मत करना’

- सेतु एवं भारत विकास परिषद की ओर से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती पर सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह आयोजित 

देहरादून: ‘भले ही दीप से पूजा तू आठोयाम मत करना, मिले कोई मोहल्ले में तो राधेश्याम मत करना, नमन करना या मत करना कोई कुछ ना कहेगा पर, शहीदों की शहादत को कभी बदनाम मत करना’ ओज के सशक्त हस्ताक्षर श्रीकांत श्री ने जब अपने गीत की यह पंक्तियां पढ़ी तो समूचा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था सेतु एवं भारत विकास परिषद की ओर से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती पर सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों की ओर से दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद धर्मेन्द्र उनियाल ‘धर्मी’ ने चार मिसरे ‘यहां आंख से बहते अश्कों की गवाही कौन देगा, सब दर्द लिखने लगेंगे तो स्याही कौन देगा। हर मां अपने बेटे को सीने से लगा लेगी, तो सरहदों की हिफाज़त के लिए सिपाही कौन देगा’ पढ़कर दर्शकों की वाहवाही लूटी।

मेरठ से आए कवि डा. प्रतीक गुप्ता ने अपनी चार पंक्तियों ‘घर, जमीन, दुकान भी दे दी, खुश हो ना, भारत के सम्मान में दे दी, खुश हो ना, स्वर्ग द्वार पर खड़ें शहीद, बस यह पूछें, हमने अपनी जान भी दे दी, खुश हो ना’ से तालियां बटोरी। भीलवाड़ा के वीर रस के कवि योगेन्द्र शर्मा की कविता ‘अंधकार का वक्ष चीरकर, सूरज नया उगाया है, रामराज्य के लिए देश में, यह दरबार सजाया है, अमर तिरंगा लाल चौक से, चाँद तलक़ फहराया है, अब लगता है देश राग में वंदेमातरम् गाया है’ को भी खूब दाद मिली।

युवा कवयित्री महिमा “श्री” ने अपने गीत ‘लहर लहर लहराये तिरंगा, लहर लहर लहराएगा, भारत माता का हर जन-जन, गीत यही दोहराएगा, बंकिम जी ने दिया मंत्र, आओ सब मिलकर जाप करें, देश भक्त जो होगा सच्चा, वन्दे मातरम गायेगा’ से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। दिल्ली से आए हास्य कवि विनोद पाल ने अपने मुक्तक ‘सुन्दर सपन सलोने चुनना बुरे ख्वाब को मत चुनना, खो दे जो पहचान तुम्हारी उस नक़ाब को मत चुनना, मेरी ये चार पंक्तिया याद रखना तुम सदा बच्चियों, रवि, सूर्य, दिनकर को चुनना आफ़ताब को मत चुनना’ से श्रोताओं की वाहवाही लूटी। इटावा के गीतकार डॉ.  राजीव राज की पंक्तियां ‘सिर्फ़ एक फूल के मानिंद ज़िंदगानी है, चार छह रोज़ से ज़्यादा नहीं कहानी है, गीत मकरन्द हैं महकेंगे हमेशा यारो, साँस की पाँखुरी तो टूट के झर जानी है’ भी खूब सराही गई।

कवि सम्मेलन का संचालन श्रीकांत श्री ने किया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, खजानदास, मेयर सौरभ थपलियाल, दायित्वधारी विश्वास डाबर, पुनीत मित्तल, श्याम अग्रवाल, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल, प्रदेश मंत्री नेहा जोशी, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल आदि मौजूद थे। आयोजक समिति में माणिक गोयल, गर्वित गुप्ता, प्रवीण नागलिया, मुदित अग्रवाल आदि शामिल थे।

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