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उर्वशी के बहाने हिंदी साहित्य की वैचारिक परंपरा पर चर्चा 

दून पुस्तकालय में श्याम सिंह ‘श्याम’ की कृति ‘उर्वशी’ का लोकार्पण

देहरादून: दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज प्रसिद्ध साहित्यकार श्याम सिंह ‘श्याम’ की खंडकाव्य कृति ‘उर्वशी’ का सभागार में लोकार्पण और उसके बाद एक चर्चा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। वक्ताओं ने इस कृति की रचना-प्रक्रिया, भावभूमि और दार्शनिक पक्षों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में उर्वशी के बहाने हिंदी साहित्य की सांस्कृतिक निरंतरता और वैचारिक परंपरा पर चर्चा हुई। इस साहित्यिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. इंदु कुमार पांडेय ने कृति का लोकार्पण करते हुए कहा कि ‘उर्वशी’ भारतीय काव्य-परंपरा की उस शाश्वत धारा से जुड़ती है, जिसमें सौंदर्य, त्याग और मानवीय मूल्यों का गहन दर्शन मिलता है। उन्होंने दून पुस्तकालय को बौद्धिक संवाद और साहित्यिक विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए पुस्तक की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए श्याम सिंह श्याम की इस कृति को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता, शिक्षावि शिक्षाविद डॉ. सविता मोहन ने की। उन्होंने कहा कि श्याम सिंह ‘श्याम’ की काव्य-भाषा में परंपरा और आधुनिक चेतना का संतुलित समन्वय दिखाई देता है, जो ‘उर्वशी’ को विशिष्ट कृति के रूप में स्थापित करता है। अतिथि वक्ता के रूप में साहित्यकार डॉ. विद्या सिंह तथा वरिष्ठ साहित्यकार मदन चन्द्र शर्मा ने कृति पर अपने विचार रखते हुए हिंदी खंडकाव्य परंपरा में श्याम सिंह की उर्वशी को एक सशक्त, विशुद्ध और संवेदनशील कृति बताया।

कार्यक्रम का संचालन पूर्व उपनिदेशक सूचना विभाग के भगवान प्रसाद घिल्डियाल ने किया। प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के चन्द्रशेखर तिवारी ने सभागार में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया।

इस कार्यक्रम में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, चन्द्रशेखर सेमवाल, के.डी. शर्मा, श्रीकांत श्री, शिव मोहन सिंह, डॉ.लालता प्रसाद, सुन्दर सिंह बिष्ट, जगदीश बाबला, राकेश बलूनी, डॉ. कमला पंत, देवेन्द्र कांडपाल, जितेन्द्र शर्मा सहित कई साहित्यकार, साहित्यप्रेमी, शोधार्थी एवं बुद्धिजीवी सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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