#uttarakhand newsउत्तराखंडशोक/श्रद्धांजलिसाहित्य

ज्ञानपीठ से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का निधन 

रायपुर (छत्तीसगढ़):  हिंदी साहित्य के मशहूर कवि और कहानीकार विनोद कुमार शुक्ल का 89 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से शुक्ल जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। साहित्यकार को पिछले महीने ही हिंदी साहित्य का सर्वोच्च सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया था। कुछ समय पहले 30 लाख की रायल्टी को लेकर उनकी खूब चर्चा हुई थी।

बता दें 1 जनवरी, 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में शुक्ल जी जन्मे थे। उन्होंने उस लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाई, जो बहुत धीमे बोलते थे, लेकिन कहानियों के जरिए पाठकों के दिल में उतर जाते थे।

उनकी कविता में गद्य का अनूठा संगम

विनोद जी ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत लगभग जयहिंद कविता-संग्रह से की, लेकिन जल्दी ही वे हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ बन गए, जिन्होंने कविता और कहानी के बीच की धुंधली रेखा को मिटा दिया। उनकी काव्य कृतियों जैसे वह आदमी चला गया, नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह, सब कुछ होना बचा रहेगा और आकाश धरती को खटखटाता है ने हिंदी कविता में नई पहचान बनाई।

शुक्ल जी की कहानियां आज भी जीवंत

उनके कहानियों की खासियत यह थी कि वे साधारण जीवन की घटनाओं को गहरी सोच और संवेदनाओं से जोड़ देते थे। उनके उपन्यास (नॉवेल) – नौकर की कमीज और दीवार में एक खिड़की रहती थी ने हिंदी गद्य को नए आयाम दिए। कहानी-संग्रह पेड़ पर कमरा और महाविद्यालय में पाठक को एक ऐसी दुनिया मिलती थी, जो जितनी साधारण लगती है, उतनी ही रहस्यमयी और गहरी थी। शुक्ल जी ने अपने कथानक में समाज की सूक्ष्मता और मानव मन की जटिलताओं को इतनी खूबसूरती से उभारा कि उनकी रचनाएं आज भी पाठकों के बीच जीवंत हैं।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button