नए साल के स्वागत में जमकर छलकाए जाम, करोड़ों रुपए की बिकी शराब

देहरादून: उत्तराखंड में नए साल के जश्न पर लोगों ने जमकर जाम छलकाए। पिछले साल के मुकाबले इस मामले में लोगों का उत्साह किसी भी रूप में कम नहीं दिखाई दिया। यह बात प्रदेश में साल के आखिरी हफ्ते में हुई शराब की बिक्री के सरकारी आंकड़ों से समझी जा सकती है। हालांकि, विदेशी शराब की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले कुछ कमी रिकॉर्ड की गई, लेकिन ओवरऑल शराब की बिक्री को देखा जाए तो लोगों ने करीब 226 करोड़ रुपए की शराब खरीदारी करते हुए इस साल के स्वागत में अपने उत्साह को बनाए रखा।
नए साल के जश्न से ठीक पहले दिसंबर के आखिरी हफ्ते में शराब की बिक्री ने एक बार फिर रिकॉर्ड के करीब पहुंचते हुए सरकार के राजस्व में इजाफा किया है। 24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक की अवधि के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण यह बताता है कि वर्ष 2024 और 2025 में इस एक सप्ताह के दौरान शराब की खपत का रुझान लगभग समान रहा, हालांकि अलग-अलग श्रेणियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
आंकड़ों के अनुसार, 24 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2024 के बीच कुल 1 लाख 51 हजार 562 पेटी शराब की बिक्री हुई थी। वहीं ठीक एक साल बाद 24 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 1 लाख 53 हजार 782 पेटी तक पहुंच गया। इस तरह कुल बिक्री में 2219 पेटियों की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि नए साल के जश्न का उत्साह 2025 में भी कम नहीं हुआ।
यदि शराब के प्रकारों के अनुसार तुलना करें तो तस्वीर और साफ होती है। विदेशी मदिरा की बिक्री वर्ष 2024 में 1 लाख 19 हजार 77 पेटी रही थी, जो 2025 में घटकर 1 लाख 12 हजार 586 पेटी पर आ गई, यानी विदेशी शराब की खपत में करीब 6491 पेटियों की गिरावट दर्ज की गई। माना जा रहा है कि बढ़ती कीमतें, सीमित बजट और विकल्प के तौर पर बीयर की बढ़ती लोकप्रियता इसकी एक वजह हो सकती है।
इसके उलट वाइन की बिक्री में हल्की बढ़ोतरी देखी गई. साल 2024 में जहां 1608 पेटी वाइन बिक्री थी। वहीं, 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 1759 पेटी हो गया। हालांकि, कुल बिक्री में वाइन की हिस्सेदारी अभी भी कम है, लेकिन शहरी इलाकों और युवा वर्ग में इसकी मांग धीरे–धीरे बढ़ती नजर आ रही है।
सबसे बड़ा उछाल बीयर की बिक्री में देखने को मिला। दिसंबर के आखिरी हफ्ते में 2024 के दौरान 30 हजार 877 पेटी बीयर की बिक्री हुई थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 39 हजार 437 पेटी तक पहुंच गया यानी करीब 8560 पेटियों की वृद्धि। ठंड के मौसम के बावजूद बीयर की बढ़ती खपत यह संकेत देती है कि नए साल के जश्न में बीयर अब लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है।
नए साल से पहले दिसंबर के आखिरी सप्ताह में शराब की बिक्री ने यह साफ कर दिया कि जश्न और शराब का रिश्ता अब भी मजबूत है। हालांकि, विदेशी मदिरा की जगह बीयर और वाइन की ओर बढ़ता रुझान बदलती उपभोक्ता पसंद और बाजार के नए ट्रेंड की ओर इशारा करता है. सरकार के लिए यह अवधि न केवल राजस्व के लिहाज से अहम रही, बल्कि भविष्य की आबकारी नीति को दिशा देने वाले संकेत भी दे गई।
इसी बात को यदि हम रुपए के लिहाज से समझें तो साल 2026 के आगमन से ठीक पहले दिसंबर के अंतिम सप्ताह में करोड़ों रुपए की शराब खरीदी गई। इस दौरान करीब 226 करोड़ रुपए की शराब की बिक्री हुई है जिससे आबकारी विभाग के माध्यम से राज्य के खजाने में भी राजस्व प्राप्ति की जा सकी है।



