हो गये रिश्ते कलंकित, लाज ने फाँसी चुनी है’
विश्व हिंदी दिवस पर ‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था की काव्य संध्या आयोजित

देहरादून: ‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक की ओर से विश्व हिंदी दिवस पर आयोजित काव्य संध्या में कवियों ने जहां सामाजिक ताने-बाने पर कविताएं सुनाई, वहीं प्यार-मोहब्बत के गीत-गजल से भी वाहवाही लूटी।
शनिवार देर शाम इंजीनियर्स एन्क्लेव में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की अध्यक्ष कविता बिष्ट ‘नेह’ द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत उद्बोधन के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था की संरक्षक डॉ. इंदु अग्रवाल ने की, जबकि मणि अग्रवाल मणिका ने प्रभावी संचालन किया। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार असीम शुक्ल की उपस्थिति रही, जबकि डॉ. राम विनय सिंह, श्रीकांत श्री, जगदीश बावला, जीके पिपिल, शिव मोहन सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।
इस काव्य संध्या को सफल बनाने में साहित्य–प्रेमी सुधीजनों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
संस्था के उपाध्यक्ष पिपिल ने अपने गीत ‘तुम चले आना भले हरज़ाई बनकर हम निहारेंगे तुम्हें सौदाई बनकर’ सुनाकर समां बांध दिया। कविता बिष्ट नेह ने ‘सदकाम करो, अभिमान करो, निज भाषा का गुणगान करो’, सिद्धि डोभाल ने ‘भॅंवर के बीच यादों की, सुहानी भोर है। ’भारती आनंद ‘अनंता’ ’बड़े खामोश चेहरे हैं ये तेरे हैं या मेरे हैं, निकी पुष्कर ‘जुर्म की जब सजा नहीं मिलती’ नस्ल में फिर हया नहीं मिलती’ सुनाकर तालियां बटोरी। मणि अग्रवाल मणिका ने वर्तमान जीवन शैली पर सुंदर नवगीत ‘हो गये रिश्ते कलंकित, लाज ने फाँसी चुनी है। शिष्टता की ओढ़नी भी आपदाओं ने बुनी है’ कुमार विजय द्रोणी जी ने जिनको भूलाने में हमको ज़माने लगे ना जाने वो चेहरे फिर क्यूँ सुहाने लगे, संजय प्रधान ‘मैं भारत लाल केवल भारत की बात करता हूं, हर दिन भारत भूमि को प्रणाम करता हूं।’ सुनाकर सबको मनन करने पर विवश कर दिया।
इस मौके पर सतेंदर शर्मा ‘तरंग’, डॉ. सत्यानंद बडोनी, महिमा श्री, डॉ. आर.डी. अग्रवाल, डॉ.विद्यासागर कापड़ी, ममता जोशी ‘स्नेहा’, स्वाति ‘मौलश्री’, एस.पी. दुबे, सनी सक्सेना, शिव चरण शर्मा मुज़्तर, सत्य प्रकाश सत्य, डॉ. क्षमा कौशिक, नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’, दीपाली गर्ग, ज्योति, दिलीप सिंह बिष्ट, जया रावत, दिनेश रावत, रुद्र रावत, ममता रावत एवं दर्शन सिंह रावत ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।



