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बीबीसी के पूर्व ब्यूरो प्रमुख मार्क टूली का निधन 

नई दिल्ली: बीबीसी के पूर्व ब्यूरो प्रमुख मार्क टूली नहीं रहे। वह 90 वर्ष के थे। 1960 के दशक में बीबीसी के भारत संवाददाता के तौर पर ब्रिटेन से आए और भारत को ही अपना घर मान लिया। उनके निधन की पहली सूचना उनके सहयोगी रहे वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली ने फेसबुक पर साझा की।

मार्क टूली को भारत एक विशाल मुल्क के तौर पर इतना पसंद आया कि भारतीयता, यहां के जनजीवन और भारतीय संस्कृति में वे गहराई से रच बस गए! भारत में ही बस गए। मार्क टुली भारत के बारे में कहते थे कि “यहां की विविधता बड़ी समृद्ध है वही पूरे भारत को जोड़ती है। इतने सारे धर्मों के लोग भारत में प्यार मोहब्बत से रहते हैं, यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। ” इस महान हस्ती को भारत में रेडियो पत्रकारिता को प्रचलित करने में इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। अंग्रेज थे पर वे हिंदी भी बोलना सीख गए थे! जाने माने टीवी पत्रकार विनोद दुआ के वे बहुत कायल थे। बोले मुझे अच्छा लगता था जब विनोद दुआ ने प्रधानमंत्री को “प्रधान सेवक” बोलना शुरू किया। फिर मैंने मार्क टूली से पूछा था भारत में इतने लंबे करियर के पीक में आपकी खबरों का इर्दगिर्ग कौन होता था, तो उन्होंने घूम फिर कर एक ही नाम लिया इंदिरा गांधी! मार्क टूली की नजर में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने से लेकर,आपात काल, जनता पार्टी का बनना और टूटना बिखरना और जनता पार्टी का पतन! 1980 में इंदिरा गांधी की वापसी और पंजाब समस्या और इंदिरा गांधी की हत्या! राजीव गांधी का प्रधानमंत्री बनना और हटना और श्रीलंका में तत्कालीन राष्ट्रपति जे आर जयवर्धने की ब्लैकमेल की कूटनीति के शिकार हुए भारत को को भारी कीमत चुकाना। उनकी रिपोर्टिंग सत्ता के खिलाफ होती थी फिर भी उनके आलोचक आज भी उन्हें हीरो से कम नहीं मानते,! जब भी उनसे बात होती थी वे अतीत और प्राचीन भारत के समृद्ध लोकतंत्र। गांधी जी के सपनों के भारत और स्वतंत्र भारत में 50 साल की घटनाएं उनकी आंखों में तैर रहीं होती थी।

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