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नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा, 1400 लोग अब भी लापता 

नई दिल्ली/काठमांडू: नेपाल में बाढ़ को लेकर राहत बचाव अभियान शुक्रवार को भी युद्धस्तर पर जारी है। 26 अगस्त की सुबह आई इस आपदा प्रभावित इलाकों में स्थित भयावह है। इस बीच नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने गुरुवार को जारी अपनी ताज़ा स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि बाढ़ के बाद 469 शव बरामद किए गए हैं और 1400 लोग अभी भी लापता हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आंकड़े जिला प्रशासन कार्यालय और जिला व राष्ट्रीय आपातकालीन संचालन केंद्रों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किए गए हैं। इसमें रसुवा में भोटे कोशी बाढ़ से पैदा हुई आपातकालीन स्थिति और बड़े पैमाने पर चलाए गए खोज और बचाव अभियानों की जानकारी शामिल है। गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में अथॉरिटी ने छठी स्टेटस रिपोर्ट जारी की। लापता बताए गए लोगों में नेपाल पुलिस के जवान, नेपाली सेना, आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स नेपाल के जवान, कस्टम्स ऑफ़िस के कर्मचारी और इमिग्रेशन ऑफ़िस के चार कर्मचारी शामिल हैं‌ लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक और विदेश में रहने वाले 127 नेपाली नागरिक शामिल हैं जो घूमने के लिए नेपाल आए थे। रिपोर्ट में 73 लोगों के घायल होने की भी जानकारी दी गई है। बचाव अभियान में पंद्रह हेलीकॉप्टर शामिल हैं, जिनमें छह नेपाल सेना के और नौ निजी क्षेत्र के हैं।

मलबे से बांध बनने के कारण नेपाल पर अचानक बाढ़ आने का एक और खतरा मंडरा रहा : विशेषज्ञ

नेपाल में दोबारा अचानक बाढ़ आने का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि जिस हिमस्खलन से संभवत: यह बाढ़ आई थी, उसका मलबा नदियों के संगम पर जमा हो रहा है, जिससे एक अस्थायी बांध बन रहा है। आईसीआईएमओडी में वरिष्ठ क्रायोस्फीयर विशेषज्ञ मोहम्मद फारूक आजम ने ये चेतावनी दी है।

‘क्रायोस्फीयर’ शब्द पृथ्वी की सतह के उन हिस्सों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो बर्फ से ढके होते हैं. शुक्रवार तक, नेपाल और तिब्बत में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 470 से ज्यादा हो गई है, और लगभग 1,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। काठमांडू के नजदीक स्थित अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) के शोधकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या ज्यादा ऊंचाई वाली जगह से शुरू हुआ हिमस्खलन अचानक आई बाढ़ का कारण हो सकता है?

आजम ने कहा, ‘‘यह घटना मूल रूप से ग्लेशियर टूटने से हुई। मौजूदा समझ के अनुसार, इसमें आधारभूत चट्टान का एक हिस्सा अपनी जगह से अलग हो गया यानी ग्लेशियर के नीचे मौजूद चट्टान अपनी स्थिति से अलग होकर घाटी में नीचे आ गई, जिससे यह आपदा हुई। ’

उन्होंने कहा, ‘‘अचानक आई बाढ़ के साथ नीचे आया यह मलबा अब नदी के संगम स्थल पर भी जमा हो रहा है, जहां फिलहाल अस्थायी बांध बन गया है। इस बांध के कारण पानी जमा हो रहा है और अनुमान है कि अगले तीन दिनों में इस अस्थायी जलाशय या झील में और अधिक पानी जमा होगा। इसलिए इस घाटी में दोबारा अचानक बाढ़ आने की आशंका है। ’ आजम ने कहा कि यह भी हो सकता है कि इस झील के किनारे धीरे-धीरे टूटें और पानी अचानक बाढ़ लाए बिना निकल जाए।

पानी का स्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ा

नेपाल के नुवाकोट में बाढ़ से प्रभावित त्रिशूली के सैनिक इलाके में बचाव अभियान चल रहा है। इस बीच, नेपाल के अधिकारियों ने बाढ़ की एक नई चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी उस जगह पर पानी का स्तर बढ़ने के बाद दी गई है, जहाँ इस हफ़्ते की शुरुआत में भयानक अचानक बाढ़ आई थी। अधिकारियों ने इलाके के लोगों और बचाव कर्मियों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने कहा कि उसी जगह पर पानी का स्तर बढ़ने से इलाके में एक और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

नेपाल में आंध्र प्रदेश के छह पर्यटक लापता

आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के उन छह पर्यटकों की पहचान की है, जिनका नेपाल यात्रा के बाद से कोई पता नहीं चल पा रहा है‌ इस सूची में कनुुरु (विजयवाड़ा के बाहरी इलाके) के चोप्पारापु रमेश बाबू, चित्तूर जिले के कुप्पम शहर के वेन्नेलाकांती बालासुब्रह्मण्यम, अन्ननदेवरा वेंकटराम और अन्ननदेवरा अनघा (काकीनाडा के मूल निवासी जो बेंगलुरु में बसे हैं), और अट्लुरी शशि कुमार और निम्मगड्डा राज्यलक्ष्मी (कृष्णा जिले के इडुपुगल्लू के मूल निवासी जो बोस्टन, USA में बसे हैं) शामिल हैं. हालांकि शुरू में यह आशंका थी कि गुंटूर की काकानी अपर्णा भी लापता हैं, लेकिन रिपोर्टों से पता चलता है कि वह तिब्बत के सागा में सुरक्षित हैं। वेन्नेलाकांती बालासुब्रह्मण्यम, अट्लुरी शशि कुमार और निम्मगड्डा राज्यलक्ष्मी ईशा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ ‘एस-3 ग्रुप’ के हिस्से के रूप में मानसरोवर यात्रा पर गए थे। बताया जा रहा है कि जब बाढ़ आई, तो वे चीनी आव्रजन कार्यालय की इमारत के अंदर थे। उनके बारे में पता लगाने की कोशिशें जारी है। चोप्पारापु रमेश बाबू आखिरी बार 26 तारीख को सुबह 8:13 बजे, बाढ़ आने से पहले चीनी सीमा पर आव्रजन कार्यालय में देखे गए थे। तब से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। बाढ़ से पहले अन्ननदेवरा वेंकटराम और अन्ननदेवरा अनघा को रसुवा जिले के तिमोर में देखा गया था। तब से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

 

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