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कमाल के फोटोग्राफर भी थे उस्ताद शायर मरहूम जिया नहटौरी

जनकवि डॉ. अतुल शर्मा ने shabdkrantilive.com से साझा की जिया नहटौरी की यादें

देहरादून: उत्तराखंड में 60 साल तक हिंदी उर्दू साहित्य की खिदमत करने वाले उस्ताद शायर जनाब ज़िया नहटौरी के निधन से उर्दू अदब जगत में एक ख़ला सा पैदा हो गया है। जनकवि डॉ. अतुल शर्मा ने शब्द क्रांति लाइव डाट काम shabdkrantilive.com से जिया नहटौरी से जुड़ी अपनी यादें साझा की। कहा कि अपनी शायरी, अदब नवाज़ी और खिदमत के लिए मशहूर ज़िया साहब ने अपनी ज़िंदगी बड़ी सादगी और खुद्दारी के साथ गुज़ारी। देहरादून में हज़ारों लोगों को उर्दू और फाइन आर्ट्स सिखाने वाले ज़िया साहब ने मुझ जैसे सैकड़ों शायरों को देहरादून में मुताररिफ कराया।

जनकवि डॉ. अतुल शर्मा ने बताया कि वरिष्ठ शायर ज़िया नहटोरी ने सन् साठ और सत्तर के ऐतिहासिक साहित्यिक समारोहों की फोटो खींची थी। उन्होंने बताया कि 1971 मे देहरादून में  ‘दहकते स्वर’ काव्य संकलन का विमोचन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम कुमार वर्मा ने किया था। इसमें दून के सभी कवियों की कवितायें शामिल की गयीं थीं। विमोचन समारोह एमकेपी डिग्री कालेज में हुआ था। इसका संचालन स्वाधीनता सेनानी और कवि श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ ने किया था। वहाँ उस समय के लगभग सभी कवि उपस्थित थे। उनकी ऐतिहासिक फोटो ज़िया नहटोरी ने खींची थी। संग्रह का संपादन श्रीमन और विश्व कर्मा ने किया था। समारोह में संकलन के सभी कवियों का सम्मान भी किया गया था। कवियों की उम्र के अनुसार क्रमशः रखा गया था। सबसे अधिक उम्र के कवि रत्नाम्बर दत्त चंदोला थे और सबसे कम उम्र का कवि डॉ. अतुल शर्मा थे।

डॉ. अतुल शर्मा

साहित्य समारोहों मे वो अपना कैमरा लिये उपस्थित रहते। चाहे वो कवि सम्मेलन हो जिसमे राष्ट्रीय कवि सोहनलाल द्विवेदी आये थे। ऐसे बहुत से चित्र उन्होंने लिए थे। इनसे पहले प्रसिद्ध फोटो ग्राहक ब्रह्मदेव और फिर बाद में आनन्द ढौडियाल‌ ने किया था। स्टूडियो कमल मार्केट में था।

जनकवि डॉ. शर्मा ने बताया कि वह हमारे घर पर साइकिल से आते थे। पहले राष्ट्रीय पर्वों पर तीन दिनों तक साहित्य समारोह होते थे। हिन्दी कवि सम्मेलन, मुशायरा और पंजाबी कवि दरबार हुआ करता था। फिर मुशायरे और कवि सम्मेलन साथ होने लगे। ज़िया नहटोरी उनमें शामिल होते थे। जब मुझे डीएवी पीजी कालेज के दीक्षांत समारोह में हिन्दी एमए में स्वर्ण पदक मिला था। तब भी वे फोटो खींच कर ले गये थे और घर में देकर गये थे। इस आत्मियता को मैं कभी भूल नहीं सकता। उनके साथ मंच साझा करने का बहुत मौका मिला था। वे फाइन आर्ट भी सिखाते थे।

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