आपदा राहत पैकेज: राज्य को राहत राशि के नाम पर एक धेला भी नहीं मिला

देहरादून: उत्तराखंड पर अगस्त और सितंबर का महीना काफी भारी रहा था। प्रदेश को आपदा के चलते करीब पांच हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ था. आपदा में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उत्तराखंड आए थे, तब तात्कालिक राहत पैकेज के रूप में पीएम मोदी ने उत्तराखंड के लिए 1200 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी, लेकिन उसमें से अभी तक उत्तराखंड को एक रुपया भी नहीं मिला।
दरअसल, इस धनराशि को लेने के लिए उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट भी कराया गया, जिसकी रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। इसी वजह से प्रदेश के पीएम मोदी की घोषणा किए गए राहत पैकेज में से एक रुपया भी नहीं मिला है।
उत्तराखंड के लिए ये मानसून सीजन काफी जख्म भरा रहा है। उत्तरकाशी का धराली व हर्षिल हो या फिर चमोली का थराली, हर जगह इस साल बारिश ने जमकर कहर बरपाया था। राजधानी देहरादून भी इस बार आपदा की मार से अछूती नहीं थी। पौड़ी, रुद्रप्रयाग और उधम सिंह नगर को कुदरत के कहर का सामना करना पड़ा था. प्रदेश के तमाम हिस्सों में कुदरत के कहर से हुए नुकसान का आपदा प्रबंधन विभाग ने आंकलन किया था। आपदा प्रबंधन विभाग ने करीब 5702.15 करोड़ रुपए का मेमोरेंडम तैयार कर भारत सरकार को भेजा था, लेकिन उत्तराखंड दौरे के दौरान पीएम मोदी ने प्रदेश को 1200 रुपए का राहत पैकेज देने की घोषणा की थी, हालांकि उसमें से प्रदेश को अभी तक मिला कुछ नहीं।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा के बाद ही राज्य सरकार ने पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट कराने का निर्णय लिया था, ताकि पीडीएनए के आधार पर केंद्र सरकार की ओर से घोषित आर्थिक पैकेज की धनराशि को जारी करवाया जा सके. इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने अक्टूबर महीने में प्रदेश के सभी जिलों का पीडीएनए कराया गया था, लेकिन अभी तक पीडीएनए की रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। यही वजह है कि भारत सरकार की ओर से घोषित 1200 करोड़ रुपए के आर्थिक राहत पैकेज से एक भी रुपया प्राप्त नहीं हो पाया है, क्योंकि पीडीएनए की रिपोर्ट के आधार पर ही अलग-अलग मदो में पैसा जारी किया जायेगा।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट के लिए गठित टीम ने सभी क्षेत्रों का भ्रमण कर लिया है। साथ ही डाटा भी एकत्र कर लिया है। पीडीएनए की काफी बड़ी रिपोर्ट है, जिसके चलते एक्सपर्ट्स के जरिए तमाम इनपुट दिए गए हैं, जिसे कंपाइल किया जा रहा है. ऐसे में पीडीएनए की रिपोर्ट तैयार होने में लगभग 10 से 15 दिन का समय लगने की संभावना है।
पूरे राज्य में पहली बार कराया जा रहा पीडीएनए: राज्य में पहले भी किसी घटना विशेष के लिए ही पीडीएनए जरूर कराया जाता है, लेकिन आपदा प्रबंधन विभाग ने पहली बार खुद से पीडीएनए किया है, जिसमें केंद्रीय एजेंसी का सहयोग मिला है। यही वजह है कि पूरी रिपोर्ट तैयार करने में देरी हो रही है, क्योंकि राज्य को पहले इस तरह का अनुभव नहीं था। ऐसे में बहुत जल्द ही पीडीएनए की रिपोर्ट को भारत सरकार को सौंपा जाएगा।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भारत सरकार ने जो आपदा के दृष्टिगत आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की थी, वो धनराशि पीडीएनए की रिपोर्ट के बाद ही आनी शुरू होगी। पीडीएनए की रिपोर्ट मिलने के बाद ही भारत सरकार की हाई लेवल कमेटी की बैठक होगी। बैठक में रिपोर्ट में दिए गए प्रस्ताव को देखा जाएगा कि कितना धनराशि जारी करना उचित होगा। उसी अनुसार धनराशि जारी की जाएगी।



