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‘घर की बगिया हरी भरी कर ली’

साहित्य सुरभि की ओर से यहां कवि गोष्ठी आयोजित 

बरेली: साहित्य सुरभि की ओर से यहां आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने जहां इश्क-मुहब्बत की रचनाएं सुनाई, वहीं सामाजिक व्यवस्था पर भी तंज कसे।   गीतकार कमलकांत ‘बहुत हुआ दर्दे दिल अब बार-बार नहीं’, ‘नत्थूलाल तुम्हारे घर का फुका कारतूस मौके में बम बन गया आठवां पास सरकारी नौकरी में लग गया’ दीपक मुखर्जी का उत्कृष्ट व्यंग रहा । मुख्य अतिथि मशहूर शायर विनय सागर जायसवाल ने दिल की बातें कुछ इस प्रकार बताई’ ‘दिल की चादर जरा बड़ी कर ली, घर की बगिया हरी भरी कर ली’।
इस मौके पर सरल कुमार सक्सेना, अमित मनोज,पीके दीवाना, किशन बेधड़क, बृजेंद्र अकिंचन, राजकुमार अग्रवाल, मनोज दीक्षित, टिंकू गजलराज,  रितेश कुमार साहनी, रामकुमार कोली, डीपी निराला, मनोज सक्सेना, रामकुमार भारद्वाज अफरोज, विवेक विद्रोही, डी.पी. निराला, रितेश साहनी, रामकुमार कोली, डॉ राजेश शर्मा ककरेली आदि की रचनाएं उत्कृष्ट एवं सराहनीय रही।

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