‘खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी थे स्व. डबराल’
बसंत विहार क्लब में बीएसएफ के पूर्व डीआईजी विनोद कुमार डबराल को दी गई भावंजलि
देहरादून: वरिष्ठ साहित्यकार डॉली डबराल के पति बीएसएफ के पूर्व डीआईजी विनोद कुमार डबराल को रविवार को यहां बसंत विहार क्लब में श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने स्व. डबराल को कर्तव्यनिष्ठ और खुशमिजाज व्यक्तित्व का धनी बताया। उन्होंने ईश्वर से डबराल परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की सामर्थ्य देने की कामना भी की।

बीएसएफ के सेवानिवृत्त आईजी एसएस कौठियाल ने कहा कि स्व. डबराल उनकी ही यूनिट सेकेंड गढ़वाल राइफल्स में थे और ड्यूटी के प्रति समर्पित थे। उन्होंने सात अफसरों के साथ मिलकर 9th गढ़वाल राइफल्स का गठन किया। कोठियाल ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी डबराल ने अपने बीएसएफ के साथियों की समस्याएं दूर करने के लिए काम किया।

साहित्यकार सत्यप्रकाश शर्मा सत्य ने कहा कि मृत्यु अटल सत्य है। जो इस दुनिया में आया है, उसका जाना निश्चित है। हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. रामविनय सिंह ने कहा कि मृत्यु को उत्सव की तरह लेना चाहिए, क्योंकि आदमी की यदि मृत्यु न हो, तो यह दुनिया बदसूरत हो जाएगी। इसलिए दुनिया में नवीनता लाने के लिए मृत्यु का होना जरूरी है। कहा कि स्मृति शेष डबराल हमेशा हमारे साथ रहेंगे।

साहित्यकार पवन शर्मा ने कहा कि स्व. डबराल खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी थे। मौत के समय भी उनके चेहरे पर मुस्कान थी। वरिष्ठ शायर अंबर खरबंदा ने स्व. डबराल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति सभी को संबल देती थी। शायरा मोनिका मंतशा, अरूण भट्ट और निशा अतुल्य ने स्व. डबराल को काव्यमय श्रद्धांजलि दी। कविता बिष्ट ने वरिष्ठ साहित्यकार केडी शर्मा की ओर से श्रद्धांजलि स्वरूप भेजी कविता पढ़ी। स्व. डबराल की बेटी ने अपने पिता की स्मृति को साझा किया।

हिंदी साहित्य समिति, उद्गार, महिला काव्य मंच, राष्ट्रीय कवि संगम, राष्ट्रीय विकास परिषद, 9वीं गढ़वाल राइफल्स के साथियों के अलावा कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के पदाधिकारियों और सदस्यों ने स्व. डबराल के शोक संतप्त परिवारजनों के शोक संदेश के माध्यम से संवेदना व्यक्त की।

कैंट विधायक सविता कपूर के अलावा वरिष्ठ कवि विजेंद्रपाल शर्मा, शिवमोहन सिंह, राकेश जैन, सतीश बंसल, शिवचरण शर्मा मुज़्तर, शादाब मशहदी, मीरा नवेली, माहेश्वरी कनेरी, रजनीश त्रिवेदी, कुमार विजय द्रोणी, स्वाति मौलश्री, दर्द गढ़वाली समेत बड़ी संख्या में साहित्यकारों और मित्रगणों ने स्व. डबराल को श्रद्धांजलि दी। संचालन क्षमा कौशिक ने किया।



