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साहित्यकारों ने की नवगीत पर सार्थक चर्चा 

- वरिष्ठ गीतकार शिवमोहन सिंह के आवास पर 'नवगीत पर चर्चा' पर एक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन 

देहरादून: वरिष्ठ गीतकार शिव मोहन सिंह के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में नवगीत पर सार्थक चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता नवगीत के शीर्ष रचनाकार असीम शुक्ल ने की। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य के संवर्द्धन के लिए समय-समय पर ऐसी संगोष्ठी का आयोजन होते रहना चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत कवयित्री अर्चना झा ‘सरित’ ने माँ वाणी की वंदना से की और इसके बाद नवगीत पर चर्चा हुई।

     वरिष्ठ गीतकार शिवमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नवगीत गीत का ही विकसित और परिष्कृत रूप है, जो यथार्थ के धरातल पर अपने नयेपन व मोहक स्वरूप के कारण विशेष आकर्षण पैदा करता है। नवगीत को गीत से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। आपने राजेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ शंभूनाथ सिंह से लेकर माहेश्वर तिवारी, असीम शुक्ल तक कई नवगीतकारों का उल्लेख करते हुए नवगीत की यात्रा पर भी प्रकाश डाला। सत्य प्रकाश शर्मा ‘सत्य’ ने कहा कि आँचलिक भाषा और बिंबों से सुसज्जित यथार्थ की अभिव्यक्ति ही नवगीत है।

     मणि अग्रवाल “मणिका” ने कुछ इस तरह नवगीत को परिभाषित किया- वह गीत जो जीवन के यथार्थ की विशेषताओं व वर्तमान समय की विद्रूपताओं को जन चेतना के धरातल पर नवीन, सटीक व प्रभावी बिंबों से अपने कलेवर में कलात्मक रूप समाविष्ट करता है, नवगीत है। नीरू गुप्ता ने भी अलग बिंबों व प्रतीकों के नयेपन के साथ लिखे गये गीत को नवगीत बताया। अर्चना झा ‘सरित’ ने भी नवगीत में नयेपन का समर्थन करते हुए मार्गदर्शन की अपेक्षा की।

 ‘नवगीत के पुरोधा’ कहे जाने वाले असीम शुक्ल ने सभी गीतकारों के विचारों को न केवल ध्यान से सुना बल्कि अपने वक्तव्य द्वारा नवगीत की विधा, शैली एवं उसके उद्भव पर प्रकाश भी डाला। उन्होंने कहा कि भले ही राजेन्द्र प्रसाद सिंह नवगीत के सूत्रधार माने जाते हैं किंतु सर्वप्रथम नवगीत वीरेंद्र मिश्र के द्वारा लिखे गये। वे स्वयं इसके साक्षी हैं। उन्होंने 1947 में लिखे गये वीरेंद्र मिश्र के कुछ गीतों का जिक्र भी किया। उन्होंने मणि अग्रवाल “मणिका” की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि आज की परिचर्चा के बाद उनकी यह धारणा टूट गई कि महिलाएँ अक्सर सृजन से पूर्व उस विषय का समुचित ज्ञान प्राप्त नहीं करतीं।

   आपने सबके प्रश्नों के यथोचित उत्तर देकर नवगीतकारों की उत्सुकता को भी शांत किया। साथ ही अपने नवगीतों से सभी को निःशब्द कर दिया। सुंदर एवं सार्थक परिचर्चा ने सभी गीतकारों की जिज्ञासाओं को तृप्त किया।

 परिचर्चा में प्रतिभाग करने वालों में वरिष्ठ गीतकार जसवीर सिंह हलधर, शादाब अली, शोभा पाराशर भी शामिल हुए। राष्ट्रीय कवि संगम के क्षेत्रीय महामंत्री वरिष्ठ कवि श्रीकांत ‘श्री’ ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

 

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