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इधर-उधर के जंगली किस्सों पर हुई सार्थक चर्चा

दून पुस्तकालय में बीस्टली टेल्स फ्रॉम हियर एण्ड देयर के हिन्दी अनुवाद पुस्तक का लोकार्पण

देहरादून: दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से शुक्रवार सायं केन्द्र के सभागार में सुपरिचित लेखक
विक्रम सेठ के बीस्टली टेल्स फ्रॉम हियर एंड देयर (इधर-उधर के जंगली किस्से) का लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक का हिंदी में अनुवाद मोहिनी गुप्ता द्वारा किया गया है। लोकार्पण के बाद यौवनिका चोपड़ा के साथ एक चर्चा भी की गई ।

मूल रूप में अंग्रेजी में लिखी गई यह पुस्तक विक्रम सेठ की एक बहुप्रशंसित पद्यात्मक दंतकथाओं का संकलन है। जिसे अब हिंदी में इधर उधर के जंगली क़िस्से शीर्षक से मोहिनी गुप्ता ने अनुवाद किया है। यह पुस्तक स्पीकिंग टाइगर बुक्स ने प्रकाशित किया है।

पुस्तक चर्चा के दौरान पुस्तक के मूल अंग्रेजी और उसके हिंदी में किये गये अनुवाद के विविध पक्षों विशेष रुप से विषय वस्तु, कथानक, उसकी भाषा शैली, शब्द सम्पदा और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से बातचीत हुई । चर्चाकारों द्वारा बातचीत में यह बात उभर कर सामने आयी कि 1992 में पहली बार प्रकाशित यह पुस्तक भारत, चीन, ग्रीस और यूक्रेन की लोककथाओं के साथ-साथ ‘गप देश’ की कल्पनात्मक कहानियों को भी समेटती है। और अपनी विनोदपूर्ण शैली, लयात्मकता और कालातीत आकर्षण के कारण यह आधुनिक परंपरा में देखा जाती है।
चर्चाकारों का मत था कि पुस्तक का हिंदी अनुवाद मूल कृति की लय, तुक और चंचलता को बनाए रखते हुए नए पाठकों तक इसकी पहुँच को विस्तार देने का प्रयास करता है।

कार्यक्रम में अनुवाद प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए मोहिनी गुप्ता ने कहा कि इस पुस्तक की छंदात्मकता ने उन्हें सीमाओं के भीतर रहते हुए ‘गीत और बोलचाल’ को रूपांतरित करने की स्वतंत्रता दी।

मोहिनी गुप्ता ने आगे कहा कि इसका हिंदी अनुवाद इसलिए किया गया कि यह हिंदी अनुवाद विक्रम सेठ की मूल लय और तुकबंदी को सहेजते हुए नए पाठकों तक पहुँचने का प्रयास करता है। भाषा और पहुँच पर बढ़ती चर्चाओं के बीच, यह एक प्रिय क्लासिक को युवा पाठकों, कविता-प्रेमियों और द्विभाषी परिवारों के सामने नए रूप में प्रस्तुत करता है। यह अनुवाद को एक रचनात्मक सेतु के रूप में स्थापित करता है, जो अलग-अलग साहित्यिक संसारों को जोड़ता है।

इस पुस्तक में दर्ज क़िस्सों के माध्यम से कई जाने-पहचाने पात्र रोचक व नए रूप रंग में सामने आये हैं- छोटा सा कछुआ जिसने फुर्तीले खरगोश को दौड़ में पछाड़ दिया, वह बुद्धिमान बंदर जिसने अपने लालची मगरमच्छ को अपनी चतुराई से चकमा दे दिया। इन किस्सों में विविध रोचक पात्रों की एक पूरी टीम है। इन दस क़िस्सों में से दो भारत से, दो चीन से, दो यूनान से, दो यूक्रेन से और दो लेखक के अनुसार-सीधे ‘गप देश’ से आए हुए हैं।

विक्रम सेठ हमारे समय के प्रमुख लेखकों में से एक हैं। वे अ सुटेबल बॉय और द गोल्डन गेट सहित तीन उपन्यासों, दो गैर-कथात्मक कृतियों और सात चर्चित कविता-संग्रहों के लेखक हैं। उनका लेखन विविध परंपराओं में फैला है, जिसमें शास्त्रीय चीनी कवियों के अनुवाद और तुलसीदास की हनुमान चालीसा का रूपांतरण भी शामिल है।

वहीं अनुवादक मोहिनी गुप्ता आरहूस विश्वविद्यालय (डेनमार्क) में पोस्टडॉक्टोरल फेलो हैं और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल. प्राप्त हैं। उन्होंने रूटलेज, ओरिएंट ब्लैकस्वान और होन्नो प्रेस के साथ अकादमिक कार्य किया है, तथा तुलिका बुक्स के लिए बच्चों की पुस्तकों का हिंदी अनुवाद किया है। वे चार्ल्स वॉलेस इंडिया ट्रस्ट–लिटरेचर अक्रॉस फ्रंटियर्स फेलो (2017) रही हैं।

संवाद संचालक यौवनिका चोपड़ा न्यू इंडिया फाउंडेशन की पूर्व एसोसिएट डायरेक्टर और स्पीकिंग टाइगर बुक्स की पूर्व संपादक हैं। वे वर्तमान में देहरादून के वैली ऑफ वर्ड्स साहित्य एवं कला महोत्सव से जुड़ी हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के निदेशक प्रो. बी. के. जोशी ने इस पुस्तक को विशेष शैली की बताते हुए इसे महत्वपूर्ण कृति बताया.उन्होंने कहा कि ‘इधर उधर के जंगली क़िस्से ‘ एक मनोरंजक, शानदार और सदाबहार, बच्चों, किशोरों सहित हर पीढ़ी के लिए मजेदार पुस्तक है।

कार्यक्रम में बीना जोशी, विभूति भूषण भट्ट, सिद्धान्त अरोड़ा, देवेन्द्र कुमार, विनोद सकलानी, नीता गुप्ता, निकोलस, चन्द्रशेखर तिवारी, डॉ. डी. के. पाण्डे, सुंदर सिंह बिष्ट, केबी. नैथाणी, विवेक तिवारी, मनोज पंजानी, रजनीश त्रिवेदी, ज्योति स्वरूप पाण्डे, रंजोना बनर्जी,सहित कई साहित्यकार, लेखक,साहित्य प्रेमी, युवा और दून पुस्तकालय के पाठक व अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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