अब सड़कों पर बनेंगे मधुमक्खी गलियारे

देहरादून: पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देश के राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ‘मधुमक्खी गलियारे’ विकसित करने की योजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य सड़कों को केवल आवागमन का माध्यम न रखकर उन्हें हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाना है।
अब तक राजमार्गों के किनारे मुख्य रूप से सजावटी पौधों का रोपण किया जाता था, लेकिन नई योजना के तहत ऐसे देशी पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, जिनसे मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों को वर्षभर भोजन मिल सके। इन गलियारों में फूलदार पेड़, झाड़ियाँ, औषधीय पौधे और घास शामिल की जाएंगी, जिससे निरंतर मकरंद और पराग उपलब्ध हो सके। इससे न केवल मधुमक्खियों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि खेती और बागवानी को भी सीधा लाभ मिलेगा।
योजना के तहत नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश और जामुन जैसे पेड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी। ये पेड़ स्थानीय जलवायु के अनुकूल हैं और अलग-अलग मौसम में फूल देते हैं, जिससे सालभर हरियाली और पुष्प उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा मधुमक्खियों के रहने के लिए मृत लकड़ी और खोखले तनों को भी सुरक्षित रखा जाएगा।
एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। ‘मधुमक्खी गलियारा’ पहल के जरिए विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय ऐसे राजमार्ग खंडों की पहचान करेंगे, जहां हर 500 मीटर से एक किलोमीटर की दूरी पर फूलों वाले पेड़ों के समूह लगाए जा सकें।
एक वर्ष में 40 लाख पौधों का लक्ष्य
वर्ष 2026-27 के दौरान एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगभग 40 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। इनमें से करीब 60 प्रतिशत पौधे ‘मधुमक्खी गलियारा’ योजना के अंतर्गत रोपे जाएंगे। यह पहल देश में हरित राजमार्गों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।



