कवियों ने ज्वलंत मुद्दों पर कविताएं सुनाकर बटोरी तालियां
साहित्यिक सँस्था "साहित्य सँगम पछवादून के 57 वें वार्षिकोत्सव पर काव्य गोष्ठी का आयोजन

विकासनगर : साहित्यिक सँस्था “साहित्य सँगम पछवादून के 57 वें वार्षिकोत्सव पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कवयित्री नीलम शर्मा के आवास पर आयोजित इस काव्य गोष्ठी में कवियों ने ज्वलंत मुद्दों पर अपनी कविताएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. कामेश्वर प्रसाद डिमरी ने दीप प्रज्वलित किया। तत्पश्चात संतोष गोयल द्वारा सुंदर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। सँस्था के 57 वें वर्ष में प्रवेश पर केक काटकर मंत्रोचारण किये गये। इसके पश्चात कवियत्री सरिता गुप्ता ने ” हमसफर हर सफर में साथ अच्छा लगता है ” रचना सुनाई। कवियत्री नीलम शर्मा ने ” जिस माँ ने हमको बोलना सिखाया,उसको ठीक बोल कहना ठीक है क्या ” गीत सुनाकर मंत्रमुग्ध किया। बेहतरीन शाइर ज़नाब मज़ाहिर खान द्वारा “किसी की आरजू मेरे दिल में यूँ मचलती है ” गजल सुनाई। युवा कवयित्री अर्शी अलम सँस्था की सदस्य बनी और उन्होंने ” बांके बिहारी मैं तो हारी ” सुंदर गीत सुनाया। संतोष गोयल जी द्वारा “मैं सवालों की तरह हूँ तू जवाबों की तरह है ” ग़ज़ल सुनायी। कवियत्री निधि सिंह द्वारा ” मुझे मेरी कहानी का कोई अंजाम मिल जाये ” गीत सुनाया। वरिष्ठ कवि त्रिलोक रावत द्वारा ” मेरे शहर में जगह जगह खुदाई हो रही है, जहाँ नहीं होनी, वहाँ भी मनमानी से हो रही है” व्यंग्य सुनाया। वरिष्ठ कवि राजीव बडोनी द्वारा उत्तराखंड की पलायन पीड़ा को ” जिनको तुम कहते हो, ये अपने ठिकाने हैं, इन रैन बसेरों में कुछ दिन और बिताने हैं। ” हृदयस्पर्शी गीत सुनाया। “सरस्वती उनियाल ने ” रसूखदारों की छाया में गुनाहों का पलना, बड़ा ही सबब बनता ज़ा रहा है ” गीत पढ़ा। कवि मनोहर ने ” लोग हंसके यार मना लेते, पीठ पीछे दगा देते ” गीत सुनाया। ज़नाब आबिद अनवर द्वारा “ग़म तेरा आज तक भी साथ मेरे है ” ग़ज़ल सुनाई। सँस्था के अध्यक्ष डॉ. कामेश्वर प्रसाद डिमरी ने बताया कि सँस्था इस वर्ष नवयुवकों को जोड़कर समाज में नशे ,स्वास्थ्य एवंम यातायात के प्रति जागरूकता अभियान चलाएंगे। साथ ही उन्होंने सँस्था को 56 वर्ष पूर्ण करने हेतु बधाई दी। इस अवसर पर सँस्था के दिवंगत कवि कवयित्रियों को याद कर उनकी याद में एक मिनट का मौन रखा गया एवं उनकी रचनाओं को पढ़ा गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मदनपाल बिरला “गजब “द्वारा बहुत ही शानदार अंदाज में किया। गोष्ठी का समापन राष्ट्रगान से हुआ।



