चारधाम यात्रा पर आ सकती हैं मुश्किलें, जगह-जगह धंसा हैं गंगोत्री हाईवे
देहरादून: अगले माह 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज हो जाएगा। शासन-प्रशासन सभी तैयारियां होने के दावे कर रहे हैं लेकिन गंगोत्री हाईवे की वर्तमान स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। गत वर्ष आई आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त गंगोत्री हाईवे की हालत में आठ माह बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है।
जिला प्रशासन ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन को तीस मार्च तक गंगोत्री हाईवे को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं लेकिन धरातल पर अभी कोई काम शुरू नहीं हो पाए है। बीते अगस्त माह में आई आपदा के दौरान लेम्चागाड, सोनगाड, डबरानी के समीप, नलूणा, भटवाड़ी, ओंगी के समीप गंगोत्री हाईवे पर भूस्खलन के साथ ही कई जगह पर सड़कें धंस गई थी।
मलबा और बोल्डर पहाड़ी पर लटक रहे
आठ माह बीत जाने के बावजूद सुधारीकरण के कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। कई वर्षों से सक्रिय नेताला के भूस्खलन जोन के सुधारीकरण के लिए आज तक कार्य नहीं हो पाए। साथ ही नलूणाा, बिशनपुर, भटवाड़ी से संगलाई, डबरानी के समीप के बीच भूस्खलन के कारण अभी मलबा और बोल्डर पहाड़ी पर लटक रहे हैं। यह हल्की बरसात में बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।
वहीं सोनगाड में सड़क बहने के बाद बीआरओ की ओर से मलबे और पत्थरों को एकत्रित कर आवाजाही शुरू करवाई गई थी। वहां पर भी नदी का जलस्तर बढ़ते ही सड़क के अस्तित्व पर दोबारा खतरा बना हुआ है। क्योंकि वहां पर किसी भी प्रकार के सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए हैं। डबरानी के समीप भी मलबा और बोल्डर पहाड़ी पर लटक रहे हैं। नीचे बदहाल सड़क से खतरा बना हुआ है।
इसके अलावा भटवाड़ी, सोनगाड के समीप धंसती सड़क दोबारा मुसीबत बनेगी। बीआरओ की ओर से मात्र हर्षिल में तेलगाड मे नारदाने और झील में डूबी सड़क के किनारे सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं। धराली में स्थिति जस की तस है। साथ ही भैरो घाटी से गंगोत्री के बीच पत्थर गिरने का भय बना हुआ है।



