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भगवान बद्री विशाल के कपाट बंद, आठ हजार से ज्यादा भक्त बने कपाट बंदी के साक्षी 

गोपेश्वर: उत्तराखंड के चमोली में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट मंगलवार दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती समेत आठ हजार से ज्यादा भक्त कपाट बंदी के साक्षी बने। कपाट बंदी के मौके पर सेना के बैंड की टुकड़ी पारंपरिक धुन बजा रही थी, जिसमें मंदिर परिसर में खड़े श्रद्धालु थिरक रहे थे। समूचे मंदिर परिसर में ‘जय बद्रीविशाल’ और ‘जय बद्रीनाथ’ के जयकारे गूंज रहे थे। श्रद्धालु शीतकाल में भगवान बद्री विशाल की पूजा जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में कर सकेंगे।

  कपाट बंदी के अवसर को खास बनाने के लिए मंदिर को 12 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया था। शुक्रवार से जारी पंचपूजा की आखिरी प्रक्रिया भी मंगलवार संपन्न हुई, जिसके तहत लक्ष्मी की सहेली का रूप धारण कर रावल ने लक्ष्मी मां की मूर्ति को मंदिर के अंदर बने गर्भगृह में नारायण भगवान के साथ स्थापित की।

 

दो दिनों की यात्रा कर नरसिंह मंदिर में पहुंचेगी शंकराचार्य की गद्दी :

26 नवंबर को शंकराचार्य की गद्दी के साथ उद्धव जी और कुबेर जी की डोली लगभग 30 किलोमीटर दूर पांडुकेश्वर पहुंचेगी, यहां पर यात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। उद्धव जी और कुबेर जी की डोली शीतकालीन के लिए यहीं पर रहेंगी, जबकि रात्रि विश्राम के बाद अगली सुबह यानी की 27 नवंबर को शंकराचार्य की गद्दी करीब 30 किलोमीटर और आगे जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में पहुंचेगी, शीतकाल में भगवान बद्री विशाल की पूजा इसी पवित्र मंदिर में होगी।

 

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