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‘डॉ. अश्वघोष की रचनाओं में दिखता है समाज का अक्स’ 

देहरादून में ओएनजीसी सभागार में प्रथम पुण्यतिथि पर डॉ. अश्वघोष को किया गया याद 

देहरादून : हिंदी के मूर्धन्य कवि स्व. अश्वघोष की प्रथम पुण्य तिथि पर ओएनजीसी ऑफिसर्स क्लब, देहरादून भव्य आयोजन सम्पन्न किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध चित्रकार एवं ग़ज़लकार विज्ञान व्रत ने और संयोजन सुप्रसिद्ध गीतकार डाॅ. बुद्धिनाथ मिश्र द्वारा किया गया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. अश्वघोष ने हर विधा पर अपनी कलम चलाई। उनके गीत-ग़ज़लों में समाज का अक्स दिखाई देता है।


इस अवसर पर डाॅ. अश्वघोष के पुराने चल-चित्रों एवं पूर्व रिकाॅर्डिड वीड़ियोज़ को स्क्रीन पर प्रदर्शित कर उनकी स्मृतियों का ताज़ा किया गया तथा डाॅ. पीयूष निगम व अरूण भट्ट द्वारा डाॅ. अश्वघोष की ग़ज़लों व गीतों का गायन किया गया। डाॅ.अश्वघोष की सुपुत्री  सिंह ने अपने पिता की रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम में बुलन्दशहर से प्रकाशित हिन्दी त्रै-मासिक पत्रिका ‘बुलन्दप्रभा’ के ‘डाॅ. अश्वघोष श्रद्धांजलि विशेषांक’ का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में पधारे साहित्याकारों विज्ञान व्रत, डाॅ. बुद्धिनाथ मिश्र, डाॅ. वीरेन्द्र आजम, डाॅ. आरपी सारस्वत, डाॅ. इन्द्रजीत सिंह, कुसुम भट्ट, मनोज इष्टवाल, रमेश प्रसून, डाॅ. अनूप सिंह,  देवेन्द्र देव ‘मिर्जापुरी’,  मुकेश निर्विकार, इस्हाक़ अली ‘सुन्दर’ द्वारा डाॅ. अश्वघोष के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।
सुप्रसिद्ध गीतकार एवं कार्यक्रम संयोजक डाॅ. बुद्धिनाथ मिश्र ने अश्वघोष को याद करते हुए कहा कि अश्वघोष भाई मुझसे छह साल बड़े थे लेकिन कद्र ऐसी करते थे, जैसे मैं ही उनसे बड़ा हूॅं। उन्होंने उन्हें याद करते हुए काव्य श्रद्धांजलि देते हुए कहा- ‘तुम क्या गए नखत गीतों के असमय शब्द गए,’ एक एक आखर गीतों के लकुवाग्रस्त हुए।’
इस अवसर पर अश्वघोष के सुपुत्रों आशीष वशिष्ठ एवं राहुल वशिष्ठ ने कार्यक्रम में पधारे अतिथियों एवं साहित्य-प्रेमियों का आभार व्यक्त किया ।
कार्यक्रम का सफल संचालन डाॅ. बसन्ती मठपाल द्वारा किया गया।

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