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सौ साल पुरानी है शमशेरगढ़ में होली गायन परंपरा 

– डॉ. अतुल शर्मा

देहरादून: बालावाला शमशेरगढ़ में होली गायन परंपरा सौ वर्ष पहले की है। इसको फिर से युवाओं द्वारा शुरू करने की परंपरा में मैने भी अपना पूरा सहयोग दिया था।

होता यह था कि सफेद कुर्ते पाजामे मे सुसज्जित गायक मंडली होली गीत गाते निकल पड़ते थे। लोकगीतो मे राधा कृष्ण, शिवजी आदि से संबंधित गीत होते। एक व्यक्ति गीत उठाता और फिर सभी गाने लगते। गांव मे हर घर मे जाते। होली से एक दो दिन पहले और फिर होली के दिन विशेष रुप से।
घरों मे जाते। लोग उनका स्वागत करते । घरो मे यह परंपरा थी हर घर से उन्हे गुड़ की भेली मिलती।
इसके बाद वे ज़ोर से कहते,,,, बोलो रे सब मिलकर भेल्ली वालों की जय🙏🙏🙏
यह गुड़ की भेली होलिका दहन के बाद प्रसाद के रुप मे दी जाती थी।

बहुत साल पहले प्रसिद्ध था झुम्मा लाला का ढप।
बहुत बड़ा। उसकी थाप इतनी तेज़ होती कि लोग झूम उठते। झुम्मा लाला का कंधे पर उठा कर लाते थे।
मै झुम्मा लाला से मिला था। भट्ट जी के साथ। उन्होंने स्वयं ढप बनायी थी और तरीका भी बताया था। अब वे नही रहे।

वर्षों बाद शिवा भट्ट से चर्चा हुई और उनके साथियों ने इसे इसे नया रुप दिया ‌। हर वर्ष मै बाला वाला शमशेर गढ़ जाता। वहां उत्साह से होलिका दहन से पहले शाम को कार्य क्रम होता।
खास आकर्षण था कवि सम्मेलन। बहुत बड़ी संख्या मे लोग आते थे।
दून ग्रामीण मंच के जिया नन्द जोशी, सुरेश पांडे, सरदार निर्मल सिह ज्ञान प्रकाश प्रभु लाल उपाध्याय देवी सिह श्रेत्र आनंद कंजरवाल क्षितिज उपाध्याय शम्भु प्रसाद भट्ट मनोहर राजेन्द्र आदि गायन और संगठन का काम करते थे। यह बात 2004 और उससे पहले की है।
मैने उस गौरवशाली परंपरा की एक एतिहासिक स्मारिका भी निकलवाई थी। जो दस्तावेज है।
होली गायन के गीतो की पंक्ति इस तरह थीं,,
कब आयेगे श्याम बृजवासी/ आपने आये न लिख भेजी पाती/ जौं पाके गेहूं गहराए/ ऐसो वृक्ष झरे पाती।

एक और उदाहरण है,,
माने न जसोदा तेरो गिरधारी।

आदि।

हर जगह ऐसी समृद्ध परंपरा है ‌। वे संरक्षित होनी चाहिए। बाला वाला शमशेर गढ़ आदि की सौ साल पुरानी परंपरा मे उत्साह भी , और उत्सव भी रहा।


वाणी विहार में हुआ होली मिलन

देहरादून: रविवार को वरिष्ठ नागरिक जनसेवा समिति वाणी विहार उत्तराखण्ड ने होली मिलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। समिति के अध्यक्ष हुकम सिंह गड़िया व महासचिव पितांबर दत्त लोहानी ने सभी को गुलाल लगाया। परंपरागत गीतों ने समा बांधा। आपसी सौहार्द से लोगों ने उत्साह से इस उत्सव को मनाया व सभी को शुभकामनाएं दी।

 

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