भंडारे के साथ ग्राम भ्योंता में पांडव लीला का समापन
ग्रामवासियों के साथ ध्याणियों ने भी दस दिवसीय समारोह का उठाया आनंद

भ्योंता (रुद्रप्रयाग): ग्राम भ्योंता और पांडव लीला समिति की ओर से आयोजित पांडव लीला का भंडारे के साथ समापन हो गया। पारंपरिक तरीके से आयोजित दस दिवसीय पांडव लीला का ग्रामवासियों के अलावा ध्याणियों ने भी खूब आनंद उठाया। पचास से ज्यादा परिवारों के इस गांव में चहल-पहल देखते ही बनती थी। करीब 18 साल बाद आयोजित इस पांडव लीला का आसपास के ग्रामवासियों ने भी आनंद लिया। पांडवों के पश्वाओं ने ग्रामवासियों के कल्याण की कामना की।
दो जनवरी को धार्मिक निशान की स्थापना के साथ ग्राम भ्योंता में पांडव लीला कार्यक्रम की शुरूआत हुई। ढोल-दमाऊ के साथ खेत्रपाल सहित सभी देवी-देवताओं का आह्वान किया गया। माना जाता है कि पांडव स्वर्गारोहण के दौरान भ्योंता गांव से भी गुजरे थे, इसीलिए इस गांव में भी पांडव लीला का आयोजन किया जाता है। पांडव लीला के दौरान पांच पांडव पश्वा पर अवतरित हुए। बजरंग बली हनुमान और भीम के पश्वा गांव भर से केले के पेड़ उखाड़कर लाते और उसे लीला स्थल पर स्थापित करते। साथ ही उस पेड़ पर लदे केलों और ग्रामीणों के घरों से लाए फलों और मिठाई को खुद खाते और प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित करते, जिसका बच्चे और बड़े-बुजुर्ग खूब आनंद उठाते।
कार्यक्रम के समापन की पूर्व संध्या में पांच पांडवों ने ढ़ोल-दमाऊ के साथ समूचे गांव का भ्रमण किया। इस दौरान ग्रामीणों ने पांच पांडवों को चाय-नाश्ता कराया। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य किरन नौटियाल, पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रदीप थपलियाल और क्षेत्र पंचायत सदस्य मकान सिंह ने कहा कि पांडव लीला जैसे आयोजन से हमारी लोक-संस्कृति मजबूत होती है।
पांडव लीला समिति के अध्यक्ष राकेश जोशी ने बताया कि पांडव स्वर्गारोहण के दौरान भ्योंता गांव से भी गुजरे थे, इसी वजह से गांव में पांडव लीला का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में दूर-दूर से आए ग्रामवासियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के आयोजन में जयकृष्ण जोशी, इंद्रमोहन जोशी, रमेश चंद्र जोशी, राधाकृष्ण जोशी, रामकृष्ण जोशी, आयुष जोशी, अंकुश जोशी, किशोर जोशी, भूपेश जोशी जगदंबा प्रसाद जोशी, शिव प्रसाद जोशी आदि ने सहयोग दिया।



