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नवकुंभ साहित्य सेवा संस्थान की पहली काव्य गोष्ठी में बिखरे विविध रंग 

देहरादून में प्रसिद्ध शायरा मोनिका मंतशा के आवास पर हुआ आयोजन, डॉ. नीलम प्रभा वर्मा ने की अध्यक्षता, सत्यप्रकाश शर्मा 'सत्य' रहे मुख्य अतिथि, दर्द गढ़वाली ने किया संचालन, राजकुमार पंवार के उपन्यास 'अब हुआ सवेरा' का भी हुआ लोकार्पण

देहरादून: नवकुंभ साहित्य सेवा संस्थान की देहरादून इकाई की पहली काव्य गोष्ठी सोमवार को संस्था की अध्यक्ष मोनिका मंतशा के आवास पर हुई, जिसमें कवियों ने श्रृंगार रस से संबंधित रचनाएं प्रस्तुत की, वहीं सामाजिक विसंगतियों पर भी तंज कसे। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री डॉ. नीलम प्रभा वर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि गीतकार सत्यप्रकाश शर्मा ‘सत्य’ रहे और संचालन दर्द गढ़वाली ने किया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध शायरा मोनिका मंतशा ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद साहित्यकार राजकुमार पंवार ने अपनी साहित्यिक गतिविधियों और उपन्यास पर चर्चा की। जाने-माने कवि कुमार विजय द्रोणी ने मां और पिता को लेकर सुंदर रचनाएं सुनाई। गीतकार सत्यप्रकाश शर्मा ‘सत्य’ ने ‘ख़त जब आया मेरे गाँव से अम्मा का आशीष भी आया’ सुनाकर मां और गांव से जुड़ी यादें ताजा की। दीपक अरोड़ा ने हिंदी और पंजाबी भाषा में शानदार ग़ज़लें पेश की। मोनिका मंतशा ने भी गीत और ग़ज़ल से महफ़िल लूटी। दर्द गढ़वाली ने भी दो ग़ज़लें पेश की, जिसे सभी ने सराहा। वरिष्ठ कवयित्री डॉ. नीलम प्रभा वर्मा ने काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए सभी की कविताओं को सराहा। साथ ही अपने गीत से तालियां बटोरी। संस्था की दून अध्यक्ष मोनिका मंतशा ने सभी का आभार जताया। साथ ही नई कार्यकारिणी का जल्द गठन करने की बात कही।

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