साहित्य
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फ़र्शे-मख़मल पे मेरे पाँव छिले जाते हैं
♥उर्दू-शायरी मुख्यत: चार घरानों में बँटी हुई है। दिल्ली घराना, लखनऊ घराना, कलकत्ता घराना और रामपुर घराना। इनमें दिल्ली घराने…
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हमारे अपने थे पगड़ी उछालने वाले
उर्दू अदब में डॉ नलिनी विभा ‘नाज़ली’ साहिबा किसी तअर्रुफ़ की मोहताज नहीं हैं वो अदब के हवाले से एक…
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आंख पर चश्मा चढ़ाया जा रहा है
ग़ज़ल आंख पर चश्मा चढ़ाया जा रहा है। मनमुताबिक खेल खेला जा रहा है।। झूठ होंठों पर सजाया जा रहा…
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महब्बत भी इबादत हो रही है
♦मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा शहर से ताल्लुक रखने वाली शाइरा अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू ‘ का शे’री मजमुआ ‘ और तुम…
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‘शहद से भी मीठा तुम्हारा नमक’
तेवरी और व्यंग्यात्मक ग़जलों पर काम कर रहे गिने-चुने ग़ज़लकारों में से एक हैं ग्वालियर के रामअवध विश्वकर्मा। उनका हाल…
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हिंदी विश्व की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाः निशंक
उत्तराखंड भाषा संस्थान की ओर से देहरादून स्थित सर्वे आडिटोरियम में गुरुवार को हिंदी दिवस पर आयोजित भव्य और गरिमामय…
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रंग महफिल में जमाने वाला
♥ ग़ज़ल रंग महफिल में जमाने वाला। अब नहीं लौट के आने वाला।। जागती हैं ये जो आंखें मेरी। कौन…
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‘है तबाही का हर तरफ आलम, हाथ किससे मिला गया मौसम’
प्रस्तुत संकलन में एक हज़ार से अधिक हिंदी ग़ज़ल के शेर संकलित हैं, जिसके संकलनकर्ता हैं हिंदी के सुपरिचित ग़ज़लकार,…
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ग़ज़ल
ग़ज़ल और भी तो थे यहां मुझको सताने के लिए। जिंदगी में आ गया वो ये बताने के लिए।। वो…
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नये ग़ज़लकारों के लिए जरूरी किताब
कुछ दिनों पहले मैंने ग़ज़ल के व्याकरण या अरूज़ से संबंधित, डाॅ कृष्ण कुमार बेदिल साहेब, (मेरठ) और श्री कुँवर…
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