साहित्य
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तंत्र को आइना दिखाती हैं युवा कवि भक्त दर्शन पांडेय की कविताएं
कविता वह है जो आपके मन को छू जाए। समाज की हकीकत से आपका सामना कराए और आपको वह अंदर…
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कितने हैं बेलिबास दरवाज़े
ग़ज़ल कितने हैं बेलिबास दरवाज़े । अब कहां गमशनास दरवाज़े ।। छोड़कर जब से वो गया घर को। किस कदर…
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दर्द गढ़वाली की शायरी में जमाने का दर्द
आम आदमी के दर्द को शिद्दत से महसूस करने वाले शायर दर्द गढ़वाली की हालिया प्रकाशित किताब ‘धूप को सायबां…
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आमजन की आवाज थे दुष्यंत कुमार
हिंदी ग़ज़ल के भी नायक थे दुष्यंत कुमार “दुष्यंत की शायरी को मिथिलेश ने बहुत गंभीरता और बारीकी से देखा…
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बेबाकी से सच्चाई को बयां करता है ग़ज़ल संग्रह ‘भोंपू सा चिल्लाते रहिए’
साहित्य समाज का दर्पण है और यदि कोई उस सच से वास्ता नहीं रखता या सच नहीं कहता और लिखता…
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दुष्यंत का पर्याय अशोक रावत
ग़जलों की दुनिया पेज के एडमिन अशोक रावत किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी ग़जलें दुष्यंत कुमार की याद…
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आजादी के आंदोलन से कम नहीं थी पृथक राज्य की लड़ाई
02 अक्टूबर 1994 का वह दिन आज भी स्मृतियों में ताजा है। देश को अहिंसा के रास्ते पर चलकर आजादी…
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