उत्तराखंड में निकाहनामा लागू करने की तैयारी
धामी सरकार ने निकाहनामा/निकाह-पंजीकरण सिस्टम को मजबूत करने के लिए काम तेज कर दिया है
देहरादून: उत्तराखंड में चुनावों से ठीक पहले धामी सरकार एक और मास्टरस्ट्रोक खेलने जा रही है। प्रदेश में अब हिन्दू, मुस्लिम युवाओं की आपस में शादी आसान नहीं होगी। उत्तराखंड में होने वाले निकाह अब निकाहनामा के आधार पर किये जाने की तैयारी है। चुनाव से पहले सरकार ने निकाहनामा पर काम तेज कर दिया है। इसके तहत हिंदू लड़की की शादी मुस्लिम लड़के से करना आसान नहीं होगा। निकाहनामा के तहत अब रजिस्टर्ड मौलवी ही निकाह पढ़ायेंगे। वहीं निकाह मान्य होगा, बिना निकाहनामे वाली शादी यूसीसी पोर्टल एक्सेप्ट ही नहीं करेगा।
आसान नहीं होगा अंतर-धार्मिक विवाह: उत्तराखंड सरकार चुनाव से पहले एक नया कदम उठाने जा रही है, जिसके तहत होने वाले निकाह अब निकाहनामा के आधार पर किये जाने की तैयारी है. चुनाव से पहले सरकार ने निकाहनामा पर काम तेज कर दिया है, जिसके तहत अंतर-धार्मिक निकाह करना आसान नहीं होगा। प्रदेश में अंतर-धार्मिक विवाहों का रजिस्ट्रेशन और वैधता प्रक्रिया बदल सकती है। राज्य सरकार अब निकाहनामा (विवाह-पत्र) को आधिकारिक मान्यता दिलाने की तैयारी में है। इसके लागू होने के बाद निकाह तभी वैध माना जाएगा, जब निकाहनामा के तहत रजिस्टर्ड मौलवी ही निकाह पढ़ायेंगे सरकार का उद्देश्य है कि सामाजिक पारदर्शिता और वैध रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जा सके।
बिना पंजीकृत निकाहनामे वाली शादियां होंगी अस्वीकार: सरकार ने निकाहनामा/निकाह-पंजीकरण सिस्टम को मजबूत करने के लिए काम तेज कर दिया है। इसके तहत निकाहनामा में वर-वधू की पहचान, धर्म और मत, विवाह की तारीख, मौलवी का रजिस्ट्रेशन नंबर और गवाहों के विवरण संबंधित जानकारी देना अनिवार्य किया जाना प्रस्तावित है इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ यूसीसी (Unified Civil Code) पर इन रिकॉर्ड्स को अपलोड करने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे बिना पंजीकृत निकाहनामे वाली शादियों को स्वीकार न किया जाए।
दोनों पक्षों का रखा जाएगा पूरा रिकॉर्ड: प्रस्ताव में कहा गया है कि केवल रजिस्टर्ड/लाइसेंस प्राप्त मौलवियों द्वारा पढ़ाये गये निकाह को ही वैध माना जाएगा। यानी पारंपरिक या निजी रीति-रिवाज़ से हुई अगर पंजीकृत नहीं हैं तो वे शादियां मान्य नहीं होंगी. सरकार का फोकस दूल्हा-दुल्हन की सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और विवाहों का पूरा रिकॉर्ड रखना है। कई मामलों में निवास प्रमाण, पहचान या विवाह के दस्तावेजों में गड़बड़ी रहती है, जिससे सामाजिक कलह या कानूनी विवाद पैदा होता है। ऐसे में रजिस्ट्रेशन से पारिवारिक विवादों, संपत्ति दावों और बच्चों की वैधानिकता से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
निकाहनामा मसौदा समिति गठित: उत्तराखंड सरकार इस प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी, प्रशासनिक और धार्मिक हितधारकों से परामर्श ले रही है। खास बात यह है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का मसौदा तैयार करने वाली विशेषज्ञ समिति ही निकाहनामा का मसौदा तैयार कर रही है. इसके लिए कमेटी गठित की गई है, जो इसका प्रारूप तैयार करने के लिए लगातार राय मसौरा ले रही है। निकाहनामा का फॉर्मेट, पंजीकरण प्रक्रिया और मौलवियों का रजिस्ट्रेशन सिस्टम को भी विकसित किया जा रहा है।
2 से तीन महीने में तैयार होगा प्रारूप: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा यूसीसी को प्रदेश में लागू कर उत्तराखंड ने एक अच्छी पहल की है। उन्होंने कहा उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। इसकी संसद में भी सराहना हुई. अन्य राज्यों में भी यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में अब प्रदेश में निकाहनामा लागू लिए जाने को लेकर चर्चा चल रही है.इस पर पूर्ण सहमति बनने के बाद भी जानकारी साझा की जाएगी। निकाह नामे का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसके लिए समिति का गठन भी किया गया है। उन्होंने कहा इसका प्रारूप अगले दो से तीन महीने में तैयार हो जाएगा।



