उत्तराखंड में पैदल यात्रियों के लिए ख़तरा बनी सड़कें, सात माह में 775 की मौत
देहरादून: उत्तराखंड में सड़क डरा रहे हैं। चिंताजनक बात ये है कि अब सड़कों पर पैदल चलने वाले लोग वाहनों की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। पैदल चलने वाले यात्रियों का सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का आंकड़ा दूसरे पायदान पर है। परिवहन विभाग के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 तक यानी इन 7 महीने के भीतर कुल 1,272 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसके चलते 775 लोगों की मौत और 1,341 लोग घायल हुए हैं।
पैदल यात्री सबसे ज्यादा असुरक्षित: इन सभी सड़क दुर्घटनाओं में 726 हादसे वाहनों के आपस में टकराने से हुए हैं, जिसमें जिनमें 394 लोगों की मौत हुई। इसके साथ ही वाहन से पैदल यात्री की टक्कर के 280 मामले सामने आए हैं, जिसके चलते 151 यात्रियों की मौत हुई है। ऐसे में ये आंकड़े इस बात को बयां कर रहे है कि पैदल यात्री सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं।
फुटपाथ पर दुकानदारों का कब्जा: पैदल चल रहे यात्रियों की मौत सड़क दुर्घटनाओं की होने के पीछे तमाम वजह सामने आ रहे हैं, जिसमें मुख्य रूप से सबसे बड़ी वजह ज्यादातर फुटपाथों पर हुआ अतिक्रमण माना जा रहा है। देहरादून में जहां फुटपाथ बने हैं, वहां भी कई जगह पैदल चलने की जगह नहीं बची है। दुकानों का सामान, वाहन पार्किंग और निर्माण सामग्री फुटपाथ पर होने से राहगीरों को मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ता है।
फुटपाथ भी संकरा: कई जगह फुटपाथ दुकानों के आगे खत्म हो जाता है, तो कहीं इतना संकरा है कि दो लोग साथ नहीं चल सकते। ऐसे में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और दिव्यांग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. फुटपाथ जो उपलब्ध हैं, वे भी अक्सर ठेलों, अस्थायी स्टॉल और अन्य अतिक्रमणों से कब्जे में रहते हैं। यही वजह है कि पैदल यात्री की थोड़ी सी लापरवाही उन्हें वाहनों की चपेट में ला देती है।
केवल अतिक्रमण ही नहीं, बल्कि लोगों की ओर से बिना सावधानियों के सड़क पार करना भी दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। तेज रफ्तार वाले वाहनों और लापरवाह ड्राइविंग के बीच जब पैदल यात्री बिना जेब्रा क्रॉसिंग या सिग्नल का इंतजार किए सड़क पार करते हैं, तो हादसे होने की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादातर सड़क दुर्घटनाएं इस तरह की ही देखी गई है कि बिना जेबरा क्रॉसिंग का इस्तेमाल के वाहनों के आवाजाही के बीच लोग सड़क क्रॉस करते हैं और कई बार वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।
सड़क सुरक्षा से निपटने के लिए दोहरी रणनीति की जरूरत: ऐसे में उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा संकट से निपटने के लिए दोहरी रणनीति की जरूरत है। एक तरफ फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करना जरूरी है, तो वही दूसरी तरफ लोगों को रोड क्रॉसिंग के दौरान सावधानियां बरतने के लिए जागरूक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उत्तराखंड में जनवरी से जुलाई 2026 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में कुल 775 लोगों की मौत हुई है। इनमें पैदल चलने वाले 151 यात्रियों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है, जिसमें से वाहन से वाहन टकराने की 726 घटनाओं में 394 लोगों की मौत हुई। वाहन से पैदल यात्रियों के टकराने की 280 घटनाओं में 151 लोगों की जान गई है। वाहन से बाइसाइकिल टकराने की 44 घटनाओं में 30 लोगों की मौत हुई है।
वहीं, वाहन से ट्राईसाइकिल टकराने की 5 घटनाओं में 5 लोगों की मौत हुई है। वाहन से एनिमल ड्रिवन कार्ट टकराने की 4 घटनाओं में 2 लोगों की जान गई है। वाहन का ऑब्जेक्ट/प्रॉपर्टी से टकराने की 59 घटनाओं में 56 लोगों की मौत हुई है। वाहन का जानवर से टकराने की 4 घटनाओं में 2 लोगों की मौत समेत अन्य कारणों से हुई 167 घटनाओं में 142 लोगों की मौत हुई है।



