#uttarakhand newsउत्तराखंडवन्यजीव हमला

देहरादून में जहरीले सांपों से बढ़ा खतरा, वन विभाग सतर्क 

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के आउटर इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जहरीले सांप एक बड़ा खतरा बन सकते हैं। ये बात वन विभाग के आंकड़े और रिकॉर्ड बता रहे हैं। वन विभाग के आंकड़ों में आउटर देहरादून में जहरीले सांपों की मौजूदगी बतायी गई है। खास बात ये है कि इसके उलट शहरी क्षेत्रों में जहरीले सांप रेस्क्यू ही नहीं हो रहे। यानी शहरों में ऐसे जहरीले सांपों की मौजूदगी कम हुई है।

देहरादून के बालावाला, मोथरोवाला, बढ़ोवाला, नथुवाला और FRI के पीछे के क्षेत्रों समेत शहर के बाहरी हिस्सों में जहरीले सांप मिलने की बात सामने आई है। इन क्षेत्रों में तेजी से निर्माण भी हो रहा है। कई स्थान जंगल, नदी-नालों तथा प्राकृतिक क्षेत्रों के करीब हैं।

देहरादून में शहर के लगातार फैलते दायरे के बीच इंसानों और सांपों के बीच टकराव का खतरा भी बढ़ता नजर आ रहा है। खास तौर पर शहर के बाहरी और जंगल से सटे इलाकों में सांपों की मौजूदगी लोगों के लिए चिंता का कारण बन रही है। वन विभाग के रेस्क्यू आंकड़ों में गैर-जहरीले सांपों की संख्या ज्यादा है, लेकिन इसके साथ कोबरा, कॉमन करैत, किंग कोबरा, रसेल वाइपर और सिंध करैत जैसी जहरीली प्रजातियां भी रेस्क्यू की गई हैं।

वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक देहरादून वन प्रभाग में जनवरी से 13 सितंबर 2026 तक कुल 542 सांप रेस्क्यू किए गए। यानी उपलब्ध रिकॉर्ड में करीब आठ महीने की अवधि में औसतन दो से ज्यादा सांप प्रतिदिन रेस्क्यू हुए हैं। बरसात के समय ही ज्यादा सांप रेस्क्यू किया जा रहे हैं।

रेस्क्यू सांपों में सबसे ज्यादा रेट स्नैक: वन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो रेस्क्यू किए गए 542 सांपों में सबसे ज्यादा संख्या रैट स्नैक की है। कुल 230 रैट स्नैक रेस्क्यू किए गए, जो पूरे आंकड़े का करीब 42 फीसदी हैं। इसके बाद वाटर स्नैक की संख्या 109 रही। इसके अलावा 59 Trinket Snake, 18 Buff Striped Keel Back, 8 Python और 4 Cat Snake भी रेस्क्यू किए गए। यानी बड़ी संख्या ऐसे सांपों की है जो जहरीले नहीं हैं, लेकिन चिंता का दूसरा पहलू जहरीली प्रजातियों की मौजूदगी है।

112 जहरीले सांपों का रेस्क्यू: आंकड़ों में दर्ज जहरीली प्रजातियों को जोड़ें तो कुल 112 जहरीले सांप रेस्क्यू किए गए। इनमें सबसे ज्यादा 62 Cobra Snake हैं. इसके बाद 41 Common Krait, 6 Sindh Krait, 2 Russell Viper और 1 King Cobra रेस्क्यू किया गया. यानी उपलब्ध कुल 542 रेस्क्यू में लगभग 21 फीसदी जहरीले सांप शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें कोबरा और करैत जैसी प्रजातियां भी हैं। इनके काटने की स्थिति में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। कॉमन करैत के 41 मामले विशेष तौर पर ध्यान खींचते हैं। वहीं 62 कोबरा की मौजूदगी भी यह बताती है कि देहरादून के रिहायशी और बाहरी क्षेत्रों में इंसानों का सामना केवल सामान्य सांपों से ही नहीं हो रहा है।

किस रेंज कर्मी ने कितने सांप रेस्क्यू किए?: आंकड़ों में रेस्क्यू किए गए सांपों का कर्मचारीवार विवरण भी दिया गया है. इसमें सुदर्शन पंवार ने सबसे ज्यादा 265 सांप रेस्क्यू किए। प्रवेश कुमार ने 131, अरशद आलम ने 81 और जितेंद्र बिष्ट ने 65 सांप रेस्क्यू किए। यानी कुल 542 रेस्क्यू में अकेले सुदर्शन पंवार के हिस्से में करीब आधे मामले आते हैं। इसके बाद प्रवेश कुमार का योगदान है। यह आंकड़ा बताता है कि विभाग की रेस्क्यू व्यवस्था में कुछ कर्मचारियों पर लगातार बड़ी संख्या में कॉल और रेस्क्यू की जिम्मेदारी आ रही है।

बारिश और निर्माण के बीच बढ़ता संपर्क: वन विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक बरसात का मौसम सांपों के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने की एक बड़ी वजह बनता है। बारिश के दौरान सांपों के बिलों और छिपने वाली जगहों में पानी भर जाता है, जिसके बाद वे सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलते हैं। इसी दौरान चूहे और मेंढक जैसे सांपों के शिकार भी अपने ठिकानों से बाहर आते हैं। खाने की तलाश में ये जीव कई बार घरों और आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ पहुंच जाते हैं। इनके पीछे सांप भी रिहायशी इलाकों तक पहुंच सकते हैं।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button