अमेठी में बडोनी समेत 21 साहित्यकार सम्मानित
अमेठी: अमेठी में प्रधानाध्यापक और कवि स्वर्गीय रामयश पाण्डेय ‘यश’ के काव्य संग्रह ‘मन के भाव’ का शनिवार को विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम अमेठी के एक होटल में हुआ, जिसमें साहित्यकार, समाज के गणमान्य लोग और स्वर्गीय रामयश पाण्डेय के परिवार के सदस्य मौजूद थे।

यह आयोजन अवधी साहित्य संस्थान अमेठी के सातवें स्थापना दिवस के मौके पर हुआ। यह संस्थान अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति को समर्पित है। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह साढ़े आठ बजे कवि गोष्ठी से हुई। इसके बाद दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक विमर्श और सारस्वत सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडेय ने बताया कि समारोह में कई विद्वानों ने हिस्सा लिया। इनमें चेन्नई मद्रास विश्वविद्यालय की प्रोफेसर पी. सरस्वती, डॉ. एम. गोविंद राजन, श्रीमती नीरजा शुक्ला, कनाडा से डॉ. अनिल कुमार शुक्ला, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक प्रोफेसर हेमराज मीणा, अंडमान से प्रोफेसर व्यास मणि त्रिपाठी, लखनऊ के डॉ. रामबहादुर मिश्र, उत्तराखंड के डॉ. लक्ष्मी प्रसाद बडोनी, प्रयागराज के संत सत्यानंद त्यागी और मध्यप्रदेश के पंडित सुधाकर शर्मा शामिल थे।

इस समारोह में अवधी भाषा और साहित्य में खास योगदान देने वाले 21 साहित्यकारों को गोस्वामी तुलसीदास अवधी सम्मान से नवाजा गया। साथ ही, अवधी भाषा और लोक संस्कृति को बचाने और बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।
इसी कार्यक्रम में स्वर्गीय रामयश पाण्डेय ‘यश’ के काव्य संग्रह ‘मन के भाव’ का विमोचन किया गया। इस पुस्तक का संपादन डॉ. अर्जुन पांडेय ने किया है। रामयश पाण्डेय का जन्म 2 नवंबर 1942 को अमेठी के भेंटुआ क्षेत्र में हुआ था। उनका निधन 22 नवंबर 2025 को हुआ।
‘मन के भाव’ में कवि की भावनाएं, सामाजिक मुद्दे और जीवन के अलग-अलग अनुभव कविताओं के जरिए बताए गए हैं। यह पुस्तक विश्व पुस्तक प्रकाशन, लखनऊ से प्रकाशित हुई है। पुस्तक में उनके बेटे सुभाष चंद्र पाण्डेय द्वारा व्यक्त भावों की भी लोगों ने सराहना की।



