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सतपाल महाराज के शंख संबंधित बयान से विवाद गहराया, तीर्थ पुरोहित भड़के 

देहरादून: बदरीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ और डीजे कॉन्सर्ट में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप, तेज डीजे संगीत पर ठुमके और मनोरंजन आधारित प्रस्तुति को लेकर विवाद जारी है। इसी बीच सूबे के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बयान ने मामले में आग में घी डालने का काम किया है, जिस पर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत आग बबूला हो गई है।

आरोप था कि धाम जैसे धार्मिक स्थल पर तेज साउंड, डीजे और डांस वाला कार्यक्रम आयोजित करना, वहां की परंपराओं के अनुरूप नहीं है। विरोध बढ़ा तो प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए। चमोली जिला प्रशासन ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर को नोटिस जारी कर कार्यक्रम की अनुमति और तेज आवाज में साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर जवाब मांगा। यानी विवाद अब आयोजन से निकलकर अनुमति और जिम्मेदारी तक पहुंच चुका है।

संस्कृति-धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बयान पर बवाल: इसी बीच अब इस पूरे मामले में उत्तराखंड के संस्कृति-धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की एंट्री हुई है। सतपाल महाराज ने बदरीनाथ में संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि वहां संगीत कोई नई बात नहीं है। उन्होंने बदरीनाथ की भौगोलिक और धार्मिक परंपराओं का जिक्र किया।

सतपाल महाराज ने कहा कि, ‘नारायण पर्वत पर भगवान बदरी विशाल का मंदिर है, जबकि, नर पर्वत की तरफ पार्किंग है और यात्री वहां से अलकनंदा पार करके मंदिर की ओर जाते हैं। इसके बाद उन्होंने बदरीनाथ में शंख बजाने से लेकर मिलिट्री बैंड और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक का उदाहरण दिया।

इसके जरिए उन्होंने ये समझाने की कोशिश की कि धाम में संगीत को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं माना जा सकता. सतपाल महाराज ने

बदरीनाथ में शंख नहीं बजाने

की बात को भी नकारा। इसके लिए उन्होंने भगवान कृष्ण के पाञ्चजन्य शंख और भगवान विष्णु के हाथ में विराजमान शंख का उदाहरण भी दिया।

“यह कहना सही नहीं है कि बदरीनाथ में शंख नहीं बजता. मंदिर के अंदर पूजा के दौरान शंख का इस्तेमाल नहीं किया जाता, लेकिन बाहर शंख बजाया जाता है.”- सतपाल महाराज, संस्कृति-धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री, उत्तराखंड

सेना के बैंड का किया जिक्र: इसके साथ ही उन्होंने बदरीनाथ में कपाट खुलने और बंद होने के समय आने वाले मिलिट्री के बैगपाइप बैंड का जिक्र किया। महाराज का कहना था कि ‘यह बैंड भगवान के सामने सम्मान के साथ वादन करता है, इसलिए यह कहना कि बदरीनाथ में संगीत की कोई जगह नहीं है, सही नहीं होगा।

उर्वशी पीठ का दिया उदाहरण: सतपाल महाराज ने उर्वशी पीठ का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि, ‘वहां गायन और संगीत होता है और बड़े-बड़े कथावाचक भी आते हैं, जो गायन करते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि ‘पिछली सरकारों के समय भी बदरीनाथ में अलग-अलग कार्यक्रम और संगीत के आयोजन होते रहे हैं।’

माणा गांव का दिया उदाहरण: इसके अलावा माणा गांव का जिक्र करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि ‘वहां स्थानीय लोगों के विवाह समारोह में भी ढोल-दमाऊं बजाए जाते हैं।’ यानी सतपाल महाराज का पूरा तर्क इस बात पर है कि बदरीनाथ में संगीत अपने आप में कोई निषिद्ध चीज नहीं है।

संगीत पर पक्ष: उन्होंने डीजे और संगीत के विवाद पर कहा कि बद्रीनाथ धाम में संगीत कोई नई बात नहीं है, और कपाट खुलने या बंद होने पर नारायण पर्वत पर मिलिट्री बैंड की धुनें भी सुनाई देती हैं, इसलिए संगीत को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं कहा जा सकता।

चारधाम महापंचायत का विरोध: चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने सतपाल महाराज के इस बयान को “हास्यास्पद” बताया है और कहा है कि डीजे विवाद से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह का बयान दिया गया है।

 

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