कवियों ने अपनी रचनाओं से दिया विश्व शांति का संदेश
‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के तत्वावधान में 'एक शाम विश्व शांति के नाम' से हुआ अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन
देहरादून: ‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के तत्वावधान में रविवार शाम को ‘एक शाम विश्व शांति के नाम’ विषय पर आधारित अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश के कवियों ने विश्व में युद्ध की विभीषिका पर चिंता जताते हुए अपनी रचनाओं में विश्व शांति का संदेश दिया। सभी कवियों ने अपनी सशक्त, भावपूर्ण एवं विचारोत्तेजक रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया तथा भरपूर सराहना प्राप्त की।

कार्यक्रम की शुरुआत मणि अग्रवाल ‘मणिका’ की सरस्वती वंदना से हुई और उसके बाद उन्होंने ‘निषेध था किया शिवा, न जाइए न जाइए।अप्राप्त सूचना प्रिये! न मान को घटाइए’ सुनाकर वातावरण को काव्य-रस से सराबोर कर दिया। अध्यक्ष कविता बिष्ट ‘नेह’ ने अपनी रचना ‘शांति का संदेश फैले, देश का कल्याण हो’प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. भारती मिश्रा की प्रस्तुति ‘देवभूमि की पावन मिट्टी कहे पुकार-पुकार के’ ने खूब सराहना अर्जित की। जीके पिपिल ने ‘वक़्त हमारे संग कर बैठा ये कैसा परिहास रे पुष्प नहीं उगते उपवन में उगे कंटीली घास रे’ और सिद्धि डोभाल ‘सागरिका’ ने ‘पादपों ने खोल दी है, पल्लवों की डोर’ सुनाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया।
इसके अलावा, डॉ. आराधना सदाशिवम (सिंगापुर) – वैज्ञानिक विधि विशेषज्ञ (लीगल प्रोफेशनल),
श्रीमती संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’ (कुवैत) – संस्थापिका अंजुमन पंखुड़ी, तथा नेपाल से पधारे सम्मानित साहित्यकार, प्रजापति नेगी, कविराज भट्ट, रमेश पन्त ‘मितबन्धु’ (शिक्षक) एवं खिमानन्द बडू (समाज-सेवक) की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। कुमार विजय ‘द्रोणी’, डॉ. भारती मिश्रा, संगीता विरमानी, महेश्वरी कनेरी, निशा ‘अतुल्य’, दर्द गढ़वाली, सुलभा बिल्लौरे, रेखा जोशी, नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’, नरेंद्र दीक्षित ने भी काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम के समापन में मुख्य अतिथि मंजू श्रीवास्तव एवं इंदु मैत्रा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में आयोजन की सराहना करते हुए साहित्य के माध्यम से विश्व शांति के संदेश को और सुदृढ़ करने का आह्वान किया। संस्था की अध्यक्ष कविता बिष्ट ‘नेह’ ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।



