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आईएमए में रचेगा नया इतिहास, पहली बार बेटियां बनेंगी ‘योद्धा’

आईएमए 93 साल के गौरवशाली इतिहास के बाद कल नया कीर्तिमान रचने जा रहा है। पहली बार बेटियां योद्धा बनकर अफसर के रूप में पासिंग आउट परेड में शामिल होंगी।

देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से शनिवार को पास आउट होकर 481 युवा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन जाएंगे। इस दौरान पहली बार महिला कैडेट भी पास आउट होंगी। 16 मित्र देशों के 34 आफिसर कैडेट भी प्रशिक्षण पूरा कर अपने देशों की सेनाओं का हिस्सा बनेंगे। कुल 515 कैडेट अकादमी के ड्रिल स्क्वायर पर परेड करते दिखाई देंगे। परेड की सलामी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु लेंगी। 93 साल पुराने आईएमए में यह पासिंग आउट परेड ऐतिहासिक होने जा रही है। पहली बार महिला कैडेट पुरुष कैडेटों के साथ कदमताल करती नजर आएंगी।

अगस्त 2022 में एनडीए में महिला कैडेटों के पहले बैच ने प्रवेश लिया था। तीन साल प्रशिक्षण के बाद मई 2025 में महिला कैडेट स्नातक हुईं, जिनमें से नौ ने सेना में सेवा का विकल्प चुना। ये नौ महिला कैडेट शनिवार को पास आउट हो जाएंगी।इस बार 481 भारतीय कैडेट सेना की शाखाओं में जिम्मेदारी संभालेंगे।

93 साल के इतिहास में 13 जून गौरव का दिन

आईएमए के 93 साल के गौरवशाली इतिहास में 13 जून को एक नया और सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है। इस दिन होने वाली पासिंग आउट परेड में पहली बार नौ महिला कैडेट पास आउट होकर भारतीय सेना में बतौर अधिकारी शामिल होंगी। यह क्षण न केवल अकादमी के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक होगा। 1932 में अपनी स्थापना के बाद से अब तक आईएमए से केवल पुरुष कैडेट ही सैन्य अधिकारी बनकर निकलते रहे हैं। अब यहां से महिलाएं सीधे स्थाई कमीशन प्राप्त कर सेना की मुख्यधारा में मोर्चा संभालेंगी।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अगस्त 2022 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पहले बैच में महिला कैडेटों ने प्रवेश लिया था। तीन साल के कड़े सैन्य और अकादमिक प्रशिक्षण के बाद मई 2025 में इन कैडेटों ने अपना स्नातक पूरा किया। इनमें से नौ महिला कैडेटों ने भारतीय थल सेना में सेवा देने का विकल्प चुना और आगे के प्रशिक्षण के लिए पिछले साल देहरादून स्थित आईएमए पहुंची। पुरुष कैडेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रणनीति, हथियार संचालन और शारीरिक दक्षता का एक साल का कठोर प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब ये 13 जून को देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सेना में महिलाओं की भागीदारी का इतिहास पुराना

सेना में महिलाओं की भागीदारी का इतिहास पुराना है, लेकिन आईएमए से उनका पास आउट होना एक युगांतरकारी बदलाव है। इससे पहले तक महिलाएं मुख्य रूप से चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए), सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) या मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के जरिए सेना का हिस्सा बनती रही हैं। शुरुआत में महिलाओं को ओटीए के माध्यम से शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) मिलता था। हालांकि बाद में स्थाई कमीशन के रास्ते खुले। एनडीए के जरिए सीधे आईएमए से स्थाई कमीशन पाना भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में मील का पत्थर है।

आरआईएमसी भी बालिका कैडेट कर रहा तैयार

आईएमए ही नहीं, बल्कि देहरादून स्थित राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) में भी बालिका कैडेट अब अपना पसीना बहा रही हैं। आरआईएमसी में लड़कियों के प्रवेश को मंजूरी मिलने के बाद बालिकाओं का प्रशिक्षण जोरों पर है। जल्द ही यहां से भी छात्राओं का पहला बैच पास आउट होकर एनडीए की परीक्षा पास करेगा और सेना में उच्च पदों पर आसीन होने का अपना सपना पूरा करेगा।

 

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