कर्मचारियों को राहत: अब 30 जून तक हो सकेंगे तबादले, शासन ने बढ़ाई अवधि
देहरादून: उत्तराखंड में उन विभागों के लिए राहत भरी खबर है, जो अबतक तबादला सत्र के दौरान कर्मियों के स्थानांतरण नहीं कर पाए थे। शासन ने नया आदेश जारी करते हुए अब तबादलों के लिए 20 दिन बढ़ाए जाने का निर्णय लिया है। शासन की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार अब विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण 10 जून के बजाय 30 जून 2026 तक किए जा सकेंगे।
कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2 की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 के तहत संचालित स्थानांतरण सत्र 2026-27 की समय-सारिणी में संशोधन किया गया है। यह आदेश अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत द्वारा जारी किया गया है। शासन ने यह निर्णय विभागों से प्राप्त फीडबैक और स्थानांतरण प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए लिया है।
दरअसल उत्तराखंड में हर वर्ष स्थानांतरण अधिनियम के तहत एक निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए जाते हैं। इस साल भी अप्रैल माह में शासन ने स्थानांतरण सत्र की प्रक्रिया शुरू करते हुए सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। कई विभाग निर्धारित अवधि के भीतर अपने स्तर पर तबादला प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाए। कुछ विभागों में रिक्त पदों की स्थिति, कार्मिकों का डाटा संकलन और प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया में देरी हुई। ऐसे में कई विभागों ने शासन से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था।
शासनादेश के अनुसार अब सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्थानांतरण आदेश जारी करने की अंतिम तिथि 10 जून के स्थान पर 30 जून निर्धारित की गई है। इसके साथ ही समय-सारिणी में शामिल अन्य सभी प्रक्रियाओं की अवधि में भी 20 दिनों की वृद्धि कर दी गई है। यानी जिन कार्यों की समय सीमा पूर्व में तय थी, उन्हें भी नए कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे स्थानांतरण प्रक्रिया व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से पूरी हो सके।
राज्य के कई विभागों में अभी तक तबादलों को लेकर अंतिम सूची तैयार नहीं हो पाई थी। कुछ स्थानों पर कर्मचारियों की कमी और संवेदनशील पदों पर तैनाती से जुड़े मामलों के कारण निर्णय लंबित थे। ऐसे में यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती तो कई विभाग अधूरी प्रक्रिया के साथ ही स्थानांतरण सत्र समाप्त होने की स्थिति में पहुंच जाते। शासन के इस फैसले से अब विभागों को आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने का अतिरिक्त समय मिल गया है।
स्थानांतरण अधिनियम, 2017 के तहत प्रत्येक वर्ष एक निश्चित अवधि में तबादलों की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को संतुलित रखना, दूरस्थ क्षेत्रों में मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों का स्थानांतरण करना है। हालांकि, हर वर्ष कुछ विभागों में समय सीमा को लेकर चुनौतियां सामने आती रही हैं। इस बार भी कई विभाग निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार काम पूरा नहीं कर पाए थे।
शासन द्वारा जारी आदेश में सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों, गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के आयुक्तों तथा सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे संशोधित समय-सारिणी के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। आदेश की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय तथा सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को भी भेजी गई है।
समय सीमा बढ़ाने से विभागों को अधिक व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार करने और उनकी समीक्षा करने का अवसर मिलेगा। इससे जल्दबाजी में लिए जाने वाले निर्णयों की संभावना भी कम होगी। वहीं, कर्मचारी संगठनों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि विस्तारित अवधि के दौरान स्थानांतरण प्रक्रिया कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ पूरी की जाती है।



