सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल हुए उत्तराखंड के सिपाही शेर सिंह पर कसा शिकंजा
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस ने सस्पेंड दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक आंदोलन में शामिल हुए पुलिस कांस्टेबल शेर सिंह के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि वह पहले से ही सस्पेंड है और उसके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया जारी है। शेर सिंह के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिनमें वे कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन देने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे और फिर अपना बैज उतार पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को थमा देते हैं।
मंच से भाषण देते हुए शेर सिंह प्रदर्शनकारियों को परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बारे में बता रहे हैं। अपने भाषण के दौरान शेर सिंह ने पेपर लीक के मामले पर सरकार पर सवाल उठाए। यही नहीं उन्होंने दावा किया कि लीक हुए पेपर किराना दुकानों पर उपलब्ध होते हैं। मैं अब नेताओं की नहीं बल्कि लोगों के लिए काम करना चाहता हूं।
सीजेपी को दिया अपना समर्थन
यही नहीं जंतर-मंतर पर अपने संबोधन के दौरान पुलिस कांस्टेबल ने कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन को समर्थन देने का एलान तो किया ही साथ ही यह भी घोषणा कर दी कि वह पुलिस सेवा से इस्तीफा दे रहा है। इसके बाद उसने खुद अपने बैज उतारकर अभिजीत दीपके को थमा दिया था। शेर सिंह ने कहा ‘मैं आप लोगों और सीजेपी के साथ हूं। अगर न्याय के लिए आवाज उठाना बगावत माना जाता है, तो हां मैं बागी हूं।
कानूनी शिकंजा कस रही उत्तराखंड पुलिस
वहीं उत्तराखंड पुलिस के मुताबिक, शेर सिंह पहले से ही एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी है और उसके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी चल रही है। एक गंभीर आपराधिक मामले में नाम आने के बाद से ही वह 2025 से ही सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं है। आईजी कुमाऊं रेंज निवेदिता कुकरेती ने शेर सिंह को लेकर जो जानकारी शेयर की है वह काफी चौंकाने वाली है।
उन्होंने बताया कि ‘शेर सिंह का छात्र आंदोलन में उकसाने वाले अनर्गल बयान वायरल हो रहे हैं। शेर सिंह 28 जून 2026 से अनधिकृत रूप से जनपद पिथौरागढ़ से अनुपस्थित था। उस संबंध में एसपी पिथौरागढ़ द्वारा नोटिस दिया गया था जिसका जवाब न मिलने पर 20 जुलाई 2026 को उन्हें संस्पेंड कर दिया गया था। कांस्टेबल का पूर्व में अपराधिक इतिहास रहा है। ये कॉस्टेबल और इसका एक अन्य साथी प्रवीण वाल्मिकी जैसे कुख्यात गैंगस्टर के साथ मिलकर संगठित अपराध में लिप्त है। ये लोग भोले-भाले लोगों को डरा धमकाकर उनकी जमीन को कब्जा करते थे जिसके संबंध में इनके विरुद्ध 2025 में हरिद्वार में एफआईआर दर्ज की गई। 15 सितंबर 2025 को इसे गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था और ये कई महीने जेल में रहा और वर्तमान में जमानत पर बाहर था। इस संदर्भ में इसके खिलाफ बरखास्तगी की कार्रवाई चल रही थी और वर्तमान में इसके द्वारा जो अनर्गल वक्तव्य दिया गया है उसके संबंध में आवश्यक कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा रही है।’
स्थानीय लोगों को धमकाता था?
पुलिस के मुताबिक शेर सिंह कथित तौर पर मनीष बॉलर, हसन अब्बास जैदी और अन्य गैंग सदस्यों के साथ मिलकर स्थानीय लोगों की जमीन पर अवैध कब्जा करने के साथ ही विवादित संपत्तियों के जरिए भी फायदा लेता था। उत्तराखंड पुलिस विभाग ने यह भी कहा कि कथित तौर पर गैंग ने पहले रुड़की की एक विधवा और उसके परिवार को भी डराया और धमकाया। वहीं इससे पहले महिला के भाई और जीजा पर गोली चलाई थी, जिससे वे डरकर किसी दूसरे जगह रहने लगे और फिर कथित तौर पर उनकी संपत्ति पर कब्जा कर उसे अवैध रूप से बेच दिया। पुलिस का आरोप है कि बतौर कांस्टेबल शेर सिंह ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।



