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राम मंदिर चढ़ावा चोरी की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इन्कार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा -कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की निष्पक्ष और तय समय सीमा के भीतर जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार को तुरंत सुन

वाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद सुनवाई के लिए लगाने की बात कही। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आसमान नहीं गिर पड़ेगा, इसमें जल्दबाजी क्या है।

 

सोमवार को न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और शील नागू की पीठ के समक्ष वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दाखिल याचिका पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया था।

इस याचिका में कहा गया है कि सीबीआई के नेतृत्व वाली मल्टीडिस्प्लीनरी स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज और प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच करनी चाहिए। साथ ही याचिका में ऐसा रेगुलेटरी सुपरवाइजरी और ऑडिट सिस्टम बनाने और लागू करने का निर्देश मांगा गया है, जो जनहित की रक्षा और लाखों भक्तों वा दान दाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी हो।

इस याचिका के अलावा इस मामले में एक अन्य वकील नरेन्द्र कुमार गोस्वामी की ओर से भी एक याचिका दाखिल की गई है जिसमें डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किये जाने की मांग है।

नरेन्द्र गोस्वामी ने भी सोमवार को अपनी याचिका का जिक्र करते हुए कोर्ट से डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के मुद्दे पर जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया। लेकिन कोर्ट ने उस याचिका पर भी जल्द सुनवाई का आदेश नहीं दिया। वो याचिका मेंशनिंग लिस्ट में नहीं थी इसलिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से मेंशनिंग की प्रक्रिया का पालन करने को कहा।

नरेन्द्र गोस्वामी की याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट घोषित करे कि राज जन्मभूमि मंदिर में रामलला विराजमान को भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे, जिसमें नगद, सोना, चांदी, गहने, कीमती सामान और डिजिटल दान शामिल है, पवित्र ट्रस्ट की संपत्ति है, जिनका प्रबंधन पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद तरीके से किया जाना चाहिए।

यह भी मांग है कि ट्रस्ट की शुरुआत से लेकर अभी तक के सभी सीसीटीवी, डीवीआर, एनवीआर फुटेज, हार्ड डिस्क, क्लाउड बैकअप, एक्सेस लाग, डिजिटल पेमेंट लाग, क्यूआर, यूपीआई पेमेंट गेटवे रिकॉर्ड, हुंडी खोलने के रजिस्टर, दान की गितनी की शीट, बैंक जमा पर्ची, मिलान रिकॉर्ड, वॉल्ट एक्सेस रजिस्टर, इन्वेन्ट्री रिकॉर्ड, और दान व चढ़ावे से जुड़े सभी दस्तावेजों को तुरंत सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए।

साथ ही मांग है कि उत्तर प्रदेश राज्य एसआईटी को निर्देश दिया जाए कि वो मामले की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश करे। ये भी कहा गया है कि अगर कोर्ट को मौजूदा चल रही जांच पर भरोसा नहीं लगता तो सीबीआई या कोर्ट की निगरानी में किसी स्वतंत्र एसआईटी से जांच का आदेश दिया जाए।

 

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