यूटीयू पेपर लीक प्रकरण ने बढ़ाई केंद्र सरकार की चिंता
देहरादून: नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर में हो रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के धरना प्रदर्शन के बीच उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) के पेपर लीक के मामले ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इस मामले से उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था भी राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गई है।
सिस्टम पर खड़े हुए सवाल: मामले की गंभीरता को ऐसा समझा जा सकता है कि सरकार को खुद इस मामले पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने का भरोसा दिया है। उधर, सवाल केवल एक प्रश्नपत्र के लीक होने का नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का है, जिसे पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित माना जाता रहा है। अब जानकार कह रहे हैं कि इतनी सख्ती के बाद अगर यह सब हो रहा है तो फिर सरकार कैसे विश्वास दिलावा पाएगी।
कैसे लीक हुआ पेपर? यूटीयू में प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया कई स्तरों की गोपनीय व्यवस्था के तहत संचालित होती है। विश्वविद्यालय पहले समन्वयक और जिला समन्वयक नियुक्त करता है। इसके बाद संबद्ध संस्थानों के योग्य शिक्षकों की सूची तैयार की जाती है और उसी सूची से सीमित लोगों का चयन प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए किया जाता है।
पूरी प्रक्रिया इतनी गोपनीय रखी जाती है कि संबंधित शिक्षक के संस्थान तक को इसकी जानकारी नहीं होती। इसके बावजूद आरोप है कि इसी प्रक्रिया के तहत चयनित एक सहायक प्रोफेसर ने प्रश्न पत्र से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचा दिए।
पेपर लीक के बारे में शिकायत आई थी। इंटरनल कमेटी बनाकर मामले की जांच की गई। जांच कमेटी की रिपोर्ट में साफ हुआ कि पेपर लीक हुआ है। इसके बाद एक्शन लेते हुए उन 22 बच्चों का पेपर निरस्त कर दिया गया। इस बीच जांच में सामने आया कि टीचर ने एक और पेपर यूनिवर्सिटी में बनाया था, जिस एग्जाम में 355 बच्चे शामिल हैं। टीचर की (इंटीग्रिटी) ईमानदारी शक के घेरे में है, तो विवि ने जोखिम नहीं उठाते हुए और सावधानियां बरतते हुए वो पेपर भी रद्द कर दिया है। विवि की तरफ से शिक्षक से संबंधित कॉलेज को पत्र लिखकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई के लिए कहा गया है। फिलहाल शिक्षक पर सात साल के लिए किसी भी शैक्षणिक गतिविधि पर भाग लेने से रोक लगा दी गई है।
– तृप्ता ठाकुर, वीसी, यूटीयू
इस घटना ने केवल एक व्यक्ति की भूमिका पर नहीं बल्कि पूरी सुरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रारंभिक जांच के दौरान विश्वविद्यालय को यह आशंका भी हुई कि मामला केवल एक विषय तक सीमित नहीं हो सकता है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीके पटेल की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी का प्रश्नपत्र भी उसी आरोपी शिक्षक ने तैयार किया था। इसी आशंका के चलते विश्वविद्यालय ने एहतियातन इस विषय की परीक्षा भी निरस्त करने का निर्णय लिया।
शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि पूरे प्रकरण में अन्य लोगों की भूमिका हो सकती है। ऐसे में जांच अब केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
व्हाट्सएप ग्रुप से खुला मामला, प्रोफेसर गिरफ्तार: वहीं, देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल की मानें तो नकल विरोधी कानून के तहत इस मामले मे आगे की कार्रवाई होगी। देहरादून पुलिस की जांच के अनुसार 8 जुलाई को आयोजित यूटीयू की सम-सेमेस्टर परीक्षा से पहले शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग झाझरा के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से छात्रों के साथ परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे।
परीक्षा समाप्त होने के बाद जब प्रश्नपत्र का मिलान किया गया तो साझा किए गए प्रश्नों और वास्तविक प्रश्नपत्र में काफी समानता मिली, विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति ने भी इस तथ्य की पुष्टि की। इसके बाद कोतवाली प्रेमनगर में मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने आरोपी सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र और किन-किन लोगों तक पहुंचा।
इस मामले में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने आंतरिक दो जांच की गई थी, जिन्हें पुलिस को सौंपा गया है और यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अनुचित लाभ कमाने के उद्देश्य से पेपर छात्रों को उपलब्ध कराए गए थे। इस पूरे मामले में डॉ. आशीष कुमार गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया।
प्रमोद कुमार, एसपी सिटी
राज्य सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। चाहे भर्ती परीक्षाएं हों या विश्वविद्यालय की परीक्षाएं। प्रश्नपत्र लीक करने और परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता भंग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सख्त नकलरोधी कानून लागू होने के बाद विभिन्न मामलों में 100 से अधिक नकल माफिया और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
– पुष्कर सिंह धामी, सीएम, उत्तराखंड –
विश्वविद्यालय ने दिए सख्ती के संकेत: यूटीयू की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा. विश्वविद्यालय ने संबद्ध संस्थानों को सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है.
छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. प्रश्नपत्र तैयार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है. प्रश्नपत्र तैयार करने में उपयोग की गई स्टेशनरी को नष्ट करना. डिजिटल कॉपी भेजने के बाद ईमेल ट्रेल हटाना और सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से संभालना पहले से ही प्रक्रिया का हिस्सा है. अब इन व्यवस्थाओं के पालन की निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
– तृप्ता ठाकुर, वीसी, यूटीयू –
केल गोपनियता काफी नहीं: इस मामले में शिक्षाविद् मेघराज सिंह का मानना है कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक गोपनीय प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है. प्रश्नपत्र तैयार करने भेजने और संग्रहित करने की डिजिटल प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है.
साइबर ऑडिट मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन सीमित डिजिटल एक्सेस लॉग मॉनिटरिंग और समय-समय पर स्वतंत्र सुरक्षा परीक्षण जैसी व्यवस्थाओं को लागू किए बिना ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोक पाना कठिन होगा। परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के साथ-साथ तकनीकी सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा।
– मेघराज सिंह, शिक्षाविद् –
भर्ती परीक्षाओं से विश्वविद्यालय तक पेपर लीक के सामने: उत्तराखंड में बीते कुछ सालों का रिकॉर्ड खंगाले तो भर्ती परीक्षा के जुड़े कई पेपर लीक हुए हैं, जिस वजह से सरकार की कई बार फजीहत भी हुई है।
-साल 2021 में यूकेएसएससी स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ था। परीक्षा रद्द कर दोबारा से करानी पड़ी।
-साल 2023 में यूकेपीएससी की पटवारी-लेखपाल भर्ती परीक्षा में आयोग के भीतर से ही पेपर लीक हो गया। यह परीक्षा भी निरस्त करनी पड़ी।
-साल 2025 में भी स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। यह परीक्षा भी बाद में रद्द करनी पड़ी थी।
अब साल 2026 में यूटीयू की नियमित सेमेस्टर का पेपर लीक हुआ।
इसके अलावा सहायक लेखाकार भर्ती परीक्षा, सचिवालय रक्षक भर्ती परीक्षा और अन्य कई भर्तियों में भी पेपर लीक या अनियमितताओं के आरोप सामने आए। ऐसे में छात्रों और युवाओं का भरोसा सरकार और सिस्टम से उठाना लाजिमी है। युवाओं को भरोसा जीतने के लिए सरकार को पहले से ज्यादा ठोस कदम उठाने होंगे।



