पुस्तक समीक्षा
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हर राह में इक नक्शे कदम छोड़ दिया है
लखनऊः मां पर शायरी से अपनी पहचान बनाने वाले मशहूर शायर मुनव्वर राना का रविवार को लखनऊ में निधन हो…
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बुकनर्ड्स के कार्यक्रम में किताबों पर हुआ मंथन
देहरादून:बुकनर्ड्स की ओर से रविवार को डालनवाला के राजमाताज कैफे में किताबों पर मंथन हुआ। साथ ही पढ़ने की आदत…
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भीतर के सन्नाटे की दर्द भरी गूँज है डॉ. तृप्ति ‘ काव्यांशी ‘की कविताएँ
डॉ. तृप्ति का पूरा नाम है तृप्ति वीरेंद्र गोस्वामी ‘ काव्यांशी ‘ । वे शब्द के महत्व को समझती हैं…
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रं समाज के लिए परिवार की तरह है हिमालय
‘बाहर का कमरा उत्सुक और प्रसन्न चेहरों से अट जाता है। कोई अपने घर से बनी च्यक्ती (स्थानीय शराब) लाया…
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काश बच्चों को सिखाए कोई बच्चा होना
मेरी पसंदीदा शाइरा पूनम प्रकाश जी का यह नायाब ग़ज़ल संग्रह कुछ रोज़ पहले भेंट स्वरूप मिला।दिल की अनंत गहराइयों…
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पेड़ से इतर छाँव कहाँ सुकून कहाँ
मनुष्य , प्रकृति और जीवन से गहरे स्तर पर जुड़े साहित्यकार श्री माधव नागदा संवेदनशील कवि होने के साथ-साथ प्रगतिशील…
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जूतियां सर पर रखी हैं पांव में दस्तार है
जनाब कृष्णकुमार ‘नाज़’ साहब किसी परिचय के मोहताज नहीं है। जनाब कृष्ण बिहारी नूर साहब के प्रिय शार्गिदों में एक नाज़…
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हिंदी ग़ज़ल के प्रश्न-प्रति प्रश्न: कमलेश भट्ट कमल
हाल ही में कमलेश भट्ट कमल जी की पुस्तक ‘हिंदी ग़ज़ल के प्रश्न-प्रतिप्रश्न’ प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक से पूर्व…
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कंक्रीट के जंगल बनते जा रहे हैं तमाम शहर
ब्लैक आइबिस’ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित जितेंद्र भाटिया की किताब ‘कंक्रीट के जंगल में गुम होते शहर’ वास्तव में हमारे चारों ओर बढ़ते जा…
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मख़्सूस लबो-लहजे़ का शायर सुभाष पाठक ‘जिया’
ग़ज़ल को दरबारों से निकलने में भले ही लंबा समय लगा हो, लेकिन अब यह खुले आकाश में उड़ान भर…
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