साहित्य
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दुष्यंत से कमतर नहीं थी हरजीत की शायरी
हरदिल अज़ीज़ शायर थे हरजीत सिंह। यही कारण था कि आसानी से हर किसी की तारीफ न करने वाले विष्णु…
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पुंगी के किरदार में खो गए श्रोता
शब्द क्रांति लाइव ब्यूरो, देहरादून: पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से शनिवार सांय संस्थान के सभागार में हिन्दी के…
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भीतर के सन्नाटे की दर्द भरी गूँज है डॉ. तृप्ति ‘ काव्यांशी ‘की कविताएँ
डॉ. तृप्ति का पूरा नाम है तृप्ति वीरेंद्र गोस्वामी ‘ काव्यांशी ‘ । वे शब्द के महत्व को समझती हैं…
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आत्माओं के महारास और ‘ प्रेम – वेदना ‘ के कवि डॉ. रामप्रसाद दाधीच ‘ प्रसाद’
प्रेम रस की नदी में अकेली नाव के अकेले यात्री के रूप में जो जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त अपनी नाव…
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वैकुंठ चतुर्दशी मेले में स्थानीय साहित्यकारों की अनदेखी से भारी आक्रोश
शब्द क्रांति लाइव ब्यूरो, देहरादून: श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित वैकुंठ चतुर्दशी मेले में स्थानीय साहित्यकारों की अनदेखी से उनमें भारी…
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रं समाज के लिए परिवार की तरह है हिमालय
‘बाहर का कमरा उत्सुक और प्रसन्न चेहरों से अट जाता है। कोई अपने घर से बनी च्यक्ती (स्थानीय शराब) लाया…
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गालियों को भी कविता में बदल देते थे फिराक गोरखपुरी
‘एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें, और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं।’ इस शेर…
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अकेलेपन की आदत हो गई है
ग़ज़ल अकेलेपन की आदत हो गई है। मुझे शायद मुहब्बत हो गई है।। मुलाजि़म हो गया बेटा मेरा भी। मुझे…
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पद्मश्री डॉ. संजय ने अपनी कविताओं से मोहा मन
शब्द क्रांति लाइव ब्यूरो, देहरादून: याद-ए-दुर्गेश नूर मंच की ओर से प्रेस क्लब में मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें…
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हसरत जयपुरी: बस कंडक्टर से गीतकार तक का सफर
हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीतकार हुए जो अपने नायाब गीतों के ज़रिए आज भी लोगों के मन में ज़िंदा…
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