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निठारी कांड से चर्चा में आए सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में दुकान पर मिला

पुलिस ने जताई आत्महत्या की आशंका, कर रही जांच 

हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार से बड़ी खबर सामने आई है। नोएडा के निठारी कांड के कारण चर्चाओं में आए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली है। सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड में निर्दोष बताते हुए बीते साल 2025 में ही बरी कर दिया था। सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार नगर कोतवाली क्षेत्र के भूपतवाला क्षेत्र में शुक्रवार को चाय के खोखे के पास मिला है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है।

अल्मोड़ा का रहने वाला था सुरेंद्र कोली: पुलिस के अनुसार भूपतवाला क्षेत्र में लालमाता मंदिर के सामने एक चाय के खोखे में करीब 50 वर्षीय व्यक्ति का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की जानकारी मिली थी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई। मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली पुत्र शंकु राम निवासी ग्राम मंगरुखाल भिकियासैंण अल्मोड़ा के रूप में हुई।

खोखे के भीतर ही किया सुसाइड: पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुरेंद्र कोली पिछले कुछ माह से हरिद्वार में रह रहा था। वह भूपतवाला क्षेत्र में ही चाय का खोखा चलाता था। शुक्रवार को किसी समय उसने खोखे के भीतर ही आत्महत्या कर ली। आसपास के लोगों ने ही सबसे पहले उसका शव देखा था।

नोएडा निठारी कांड से चर्चाओं में आया था सुरेंद्र कोली: बता दें कि सुरेंद्र कोली का नाम उत्तर प्रदेश के चर्चित नोएडा के निठारी कांड में साल 2006 में सामने आया था‌। इस मामले में पुलिस ने सुरेंद्र कोली को मुख्य आरोपी बनाया था। हालांकि साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को सभी आरोपी से बरी करते हुए निर्दोष पाया था।

चार दिन पहले ही खोला था चाय का खोखा: फिलहाल पुलिस को जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार कोली चार दिन पहले ही हरिद्वार नगर कोतवाली क्षेत्र में आया था। यहां भूपतवाला में उसने चाय का खोखा खोला था। उससे पहले वो हरिद्वार के रोशनाबाद में सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहा था। फिलहाल पुलिस अब सुरेंद्र कोली के हरिद्वार में रहने, परिचितों और पिछले कुछ समय की गतिविधियों के संबंध में भी जानकारी जुटा रही है।

परिवार ने कर दिया था अलग: पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया पारिवारिक क्लेश के चलते आत्महत्या किए जाने की आशंका है। हालांकि अभी आत्महत्या के कारणों की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निठारी कांड में नाम आने के बाद परिवार ने उसे अलग कर दिया था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौके से किसी तरह का सुसाइड नोट मिला है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ ही मृतक के संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ कर रही है। मामले की जांच जारी है।

पुलिस का बयान: नगर कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर कुंदन सिंह राणा ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। कोली हरिद्वार में रहकर चाय का खोखा चल रहा था। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के असली कारणों का पता लग पाएगा। गहनता से मामले की जांच की जा रही है।

सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या की है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। कोली का शव चाय के खोखे में ही मिला है। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। फारेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है। बाकी सही जानकारी तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल पाएगी।

क्या है पूरा मामला: दरअसल यूपी के नोएडा के सेक्टर-31 में डी-5 निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंढेर ने 2005 में कोठी खरीदी, जहां मोनिंदर सिंह पंढेर अकेला रहता था। कोठी की देखरेख और खाना बनाने के लिए मोनिंदर सिंह पंढेर ने सुरेंद्र कोली को नौकरी पर रखा था। इसी इलाके में साल 2005 और 2006 के बीच में एक कई बच्चे और युवतियां गायब होने के मामले सामने आए थे। हालांकि शुरुआत में पुलिस ने मामलों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन बाद में एक लड़की के गायब होने के बाद जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पंधेर के घर के पीछे के नाले से 19 कंकाल बरामद किए गए।

इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने इस मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया है। जांच आगे बढ़ी तो साल 2009 में गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने एक मामले में दोनों को फांसी की सज़ा सुनाई। हालांकि बाद में ये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दोनों ही आरोपियों को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया था।

 

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