‘पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है’ मीर की शायरी के सहारे मजरूह ने बनाया यादगार फिल्मी गीत
देहरादून: मीर तकी मीर की सदियों पुरानी शायरी जब लता मंगेशकर-मोहम्मद रफी की आवाज में ढली तो एक यादगार नगमा बन गया। अमिताभ बच्चन-जया भादुड़ी पर फिल्माया ‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा’ 54 साल बाद भी प्यार और दर्द का वही खूबसूरत एहसास जगाता है।
1972 में आई फिल्म ‘एक नजर’ का गीत ‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है’ आज भी संगीत प्रेमियों के बीच खास जगह रखता है। यह सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं है, बल्कि मशहूर उर्दू शायर मीर तकी मीर की शायरी से जुड़ा हुआ है। मीर की लिखी पंक्तियों को गीतकार मजरूह सुलतानपुरी ने फिल्म के लिए इस्तेमाल किया। इस गीत को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी। अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी पर फिल्माए गए इस गीत में प्यार और दर्द दोनों नजर आते हैं। यही वजह है कि 54 साल बाद भी यह गीत पुराना नहीं लगता।
मीर तकी मीर की शायरी से बना था गीत
मीर तकी मीर को उर्दू शायरी के बड़े नामों में गिना जाता है। उन्हें ‘खुदा-ए-सुखन’ भी कहा जाता है। उनकी शायरी में प्यार, दर्द और अकेलेपन की झलक खूब मिलती है. उनकी मशहूर गजल की पंक्तियां हैं, ‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है, जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग तो सारा जाने है।’
इसी शायरी की पंक्ति को मजरूह सुलतानपुरी ने फिल्मी गीत का आधार बनाया। उन्होंने मीर की पंक्ति को रखते हुए बाकी बोल फिल्म की कहानी और किरदारों के हिसाब से लिखे। इस तरह करीब ढाई सौ साल पुरानी शायरी एक नए अंदाज में सिनेमा तक पहुंची।
अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी पर हुआ था फिल्मांकन
‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है’ को फिल्म ‘एक नजर’ में अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी पर फिल्माया गया था। फिल्म में अमिताभ ने आकाश का किरदार निभाया था, जिसे कविता और शायरी का शौक है। जया भादुड़ी ने शबनम का किरदार निभाया था. फिल्म की कहानी एक कवि और तवायफ के बीच प्रेम पर आधारित थी। कहानी में आकाश की लिखी कविता शबनम गाती है और इसी के जरिए दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं। ऐसे में यह गीत उनके छिपे हुए प्यार और भावनाओं को पर्दे पर दिखाता है।
लता-रफी की आवाज ने बना दिया यादगार
इस गीत को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने गाया था। दोनों की आवाज ने मीर की शायरी को एक अलग एहसास दिया। गीत का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था। उनकी धुन और लता-रफी की आवाज ने इसे यादगार बना दिया। ‘एक नजर’ का निर्देशन बी आर इशारा ने किया था और फिल्म 28 जुलाई 1972 को रिलीज हुई थी। फिल्म में नादिरा भी अहम भूमिका में थीं। रजा मुराद ने भी इसी फिल्म से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ी सफलता नहीं बन सकी, लेकिन इसका यह गीत आज भी याद किया जाता है।



