गंगोत्री-केदारताल ट्रेक से लापता आठ में से दो ट्रेकरों के शव मिले
देहरादून: उत्तरकाशी के गंगोत्री-केदारताल ट्रेक पर लापता स्थानीय गाइड सहित उत्तर प्रदेश व पश्चित बंगाल के आठ ट्रेकरों में से मंगलवार को दो के शव बरामद किए गए। इनमें एक पुरुष और एक महिला ट्रेकर हैं। हालांकि शवों की पहचान नहीं हो सकी है। दोपहर बाद मौसम प्रतिकूल होने के कारण सर्च अभियान रोक दिया गया। इसे बुधवार को फिर शुरू किया जाएगा। रेस्क्यू टीम की ओर से हेलीकाप्टर उतारने के लिए घटनास्थल पर वैकल्पिक हेलीपैड भी बनाया गया है।

सोमवार को प्रशासन ने लापता स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा समेत उत्तर प्रदेश और बंगाल के सात ट्रेकरों की तलाश के लिए एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की 10 सदस्यीय टीम को हेलीकाप्टर से केदारताल ट्रेक पर उतारा था। इससे पहले रविवार को गंगोत्री नेशनल पार्क और गढ़वाल हिमालय माउंटेनियरिंग एंड ट्रेकिंग एसोसिएशन की नौ सदस्यीय टीम पैदल भोजखड़क पहुंची थी। सोमवार को एसोसिएशन की टीम को केदारताल ट्रेक पर केदारखड़क व भोजखड़क के बीच टेंट, बैग, कपड़े, चप्पलें, राशन आदि सामान बर्फ में दबा मिला था। मंगलवार को हेलीकाप्टर से उतारी गई प्रशासन की 10 सदस्यीय टीम ने दोबारा सर्च अभियान शुरू किया, जिसमें टेंट वाली लोकेशन से नीचे दो शव मिले। ये शव हेलीकाप्टर से उतारी गई प्रशासन की 10 सदस्यीय टीम को उस जगह पर मिले, जहां सोमवार को बर्फ में दबा टेंट मिला था। शवों को बाहर निकालने के लिए टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
बता दें कि सोल सीकर ट्रेकिंग एजेंसी का 12 सदस्यीय दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से 26 किमी लंबे केदारताल ट्रेक पर रवाना हुआ था। इसमें एक गाइड, सात ट्रेकर और चार सपोर्ट स्टाफ सदस्य थे। इनकी वापसी 29 अक्टूबर को तय थी, लेकिन यह दल नहीं लौटा।
लापता बहनों की तलाश में पहुंचा भाई
केदारताल हिमस्खलन हादसे में लापता ट्रेकरों को लेकर उनके परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। घटना की जानकारी मिलने पर लखनऊ के गायत्रीपुरम निवासी अतुल वर्मा अपने चार दोस्तों के साथ मंगलवार को उत्तरकाशी पहुंचे। अतुल ने बताया कि हादसे के बाद उसकी दो सगी बहनें वर्तिका वर्मा (29) और दीपिका वर्मा (30) लापता हैं। दोनों मल्टीनेशनल कंपनी के लिए घर से आनलाइन काम करती थीं और उन्हें पहाड़ों पर घूमने व ट्रेकिंग का शौक था। अगस्त में दोनों फूलों की घाटी भी गई थीं।
अतुल ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी ट्रेकिंग एजेंसी सोल सीकर के आनलाइन प्लेटफार्म से मिली। उनका आरोप है कि एजेंसी ने संपर्क करने पर भी उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। जबकि, हादसे के बाद एजेंसी को उन्हें जानकारी देनी चाहिए थी। अतुल ने प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे सर्च अभियान पर संतुष्टि जताई। बताया कि हादसे के बाद से उनके पिता नारायण वर्मा और मां उषा वर्मा बेहद परेशान हैं।
दलिया खाकर गुजारीं दो रातें
हिमस्खलन के बाद चार पोर्टरों ने दो रात भोजखड़क में बिताईं। आगे-पीछे लगातार हिमस्खलन के कारण उनके लिए नीचे उतरना मुश्किल हो गया था। खाने के नाम पर उनके पास सिर्फ एक पैकेट दलिया था। इसी से उन्होंने दो रातें गुजारीं। हादसे में सुरक्षित बचे नाल्ड निवासी पोर्टर एवं कुक रोहन राणा ने बताया कि 29 अक्टूबर को लौटते समय केदारखड़क और भोजखड़क के बीच वे टीम के बाकी सदस्यों से अलग हो गए थे। रास्ते में लगातार एवलांच आने के कारण उनको 29 व 30 अक्टूबर की रात भोजखड़क में ही गुजारनी पड़ी। उनके पास एक पैकेट दलिया था, जिसे खाकर उन्होंने समय काटा। शनिवार सुबह मौसम खुलने पर उन्हें नीचे की ओर जाते भालू के पैरों के निशान दिखाई दिए। उन्हीं के सहारे वे आगे बढ़े और सुरक्षित नीचे पहुंच गए। वहीं, गुरुग्राम में सेवारत पश्चिम बंगाल निवासी सुब्रतो मंडल ने बताया कि हिमस्खलन की घटना में उसके मामा रिंटू मंडल भी अपने चार अन्य दोस्तों के साथ लापता हैं। उन्हें उच्च हिमालय के ग्लेशियर वाले ट्रेक रूट पर ट्रेकिंग का कोई अनुभव नहीं था।



