उत्तराखंड आने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस वसूली शुरू
- पहले दिन आई तकनीकी अड़चनें, नारसन चेक पोस्ट से हुआ औपचारिक आगाज

देहरादून: उत्तराखंड आने वाले बाहरी राज्यों की गाड़ियों से ग्रीन सेस वसूली शुरू हो गई है। राज्य सरकार लंबे समय से इसकी कवायद कर रही थी, जिसका बुधवार से विधिवत आगाज हो गया। अब दूसरे राज्यों से आने वाले निजी और व्यावसायिक वाहनों को ग्रीन सेस का भुगतान करना होगा। वहीं, पहले दिन कई तकनीकी अड़चनें आई।
हरिद्वार के नारसन चेक पोस्ट से औपचारिक आगाज: उत्तराखंड सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और सड़क ढांचे के रखरखाव के मकसद से यह व्यवस्था लागू की है। इसकी औपचारिक शुरुआत हरिद्वार के नारसन चेक पोस्ट से की गई, जहां पहले ही दिन काफी संख्या में वाहनों की जांच और सेस वसूली की गई।
पहले दिन पेश आईं कई दिक्कतें: व्यवस्था लागू होने के पहले दिन ही परिवहन विभाग को कई तरह की तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। नेटवर्क कनेक्टिविटी कमजोर होने और शुरुआती स्तर पर सॉफ्टवेयर से जुड़ी खामियों के कारण सभी वाहनों से निर्धारित सेस नहीं वसूला जा सका। इसके बावजूद विभागीय अमले ने हालात संभालते हुए आंशिक रूप से वसूली का काम जारी रखा।
पहले दिन इतने वाहनों से लिया गया ग्रीन सेस: परिवहन विभाग के मुताबिक, पहले दिन नारसन चेक पोस्ट पर करीब 850 वाहनों को रोका गया। इनमें से करीब 650 वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली सफलतापूर्वक की गई। बाकी वाहनों से तकनीकी कारणों के चलते शुल्क नहीं लिया जा सका। परिवहन विभाग का कहना है कि इन दिक्कतों को अस्थायी माना जा रहा है, जल्द ही सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा।
राज्य सरकार के फैसले के तहत उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले दूसरे राज्यों के सभी प्रकार के वाहनों को इस ग्रीन सेस के दायरे में लाया गया है, हालांकि, कुछ श्रेणियों को इससे छूट भी दी गई है, जिसमें एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस, सैन्य वाहन और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों से यह शुल्क नहीं लिया जाएगा। ताकि, आपात सेवाओं में किसी तरह की बाधा न आए।
ग्रीन सेस लागू करने की योजना में हुई देरी: दरअसल, उत्तराखंड में ग्रीन सेस लागू करने की योजना पहले एक जनवरी 2026 से प्रभावी होनी थी, लेकिन तकनीकी तैयारियां पूरी न होने के कारण इसे उस समय लागू नहीं किया जा सका. अब आवश्यक सिस्टम तैयार होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जा रहा है।
सरकार क्यों ले रही ग्रीन सेस? उत्तराखंड सरकार का मानना है कि ग्रीन सेस से मिलने वाली राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, सड़कों की मरम्मत और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। साथ ही इससे राज्य में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलेगी।
तकनीकी खामियों करने में जुटा परिवहन विभाग: फिलहाल, परिवहन विभाग का फोकस तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर कर व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लाने पर है, ताकि, बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस की वसूली बिना किसी रुकावट के की जा सके।
गढ़वाल क्षेत्र में यहां लगे कैमरे: उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा तिमली रेंज कुल्हाल, आशारोड़ी बॉर्डर, नारसन बॉर्डर, गोवर्धनपुर, चिड़ियापुर में कैमरे लगे हैं, जहां भारी वाहनों से 120 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से सेस लिया जाएगा। बस से 140 रुपए लिया जाएगा। ट्रक की आकार के अनुसार 140 से 700 रुपए तक लिया जाएगा।
कुमाऊं क्षेत्र में यहां लगे कैमरे: काशीपुर, जसपुर, खटीमा, रुद्रपुर, पुलभट्टा (बरेली रोड) समेत कई स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं। दोपहिया वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी वाहन, सरकारी वाहन, एंबुलेंस और अग्निशमन वाहनों को छूट मिलेगी। वाहन श्रेणी के अनुसार सेस की बात करें तो चार पहिया वाहन से 80 रुपए लिया जाएगा. डिलीवरी वैन से 250 रुपए लिया जाएगा।
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पहले दिन आई तकनीकी दिक्कतों को गंभीरता से लिया गया है। नेटवर्क और सॉफ्टवेयर से जुड़ी खामियों को दूर करने के लिए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दे दिए गए हैं। आने वाले दिनों में यह व्यवस्था और अधिक सुचारु होगी। प्रदेश के सभी प्रवेश मार्गों पर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
एसके सिंह, अपर परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड



