लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस ने की प्रदेश कार्यकारिणी घोषित
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की टीम में है 24 उपाध्यक्ष और 36 महासचिव
देहरादून: लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस ने प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की टीम में 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव और 107 सचिव बनाए गए हैं।

हरीश रावत समेत पार्टी के 41 वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारी समिति में शामिल किया गया है। गुरुवार देर रात राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कार्यकारिणी की घोषणा की। पिछले साल नवंबर में गोदियाल के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कमान संभालने के बाद से कार्यकारिणी का इंतजार हो रहा था। कोषाध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी गोदावरी थापली को दी गई है।
पार्टी में राजेन्द्र भंडारी, नवीन जोशी, अभिषेक सिंह, विजय गुंसोला, तेलू राम, पुष्कर जैन, राकेश लाल शाह, दीप शर्मा, मकबूल कुरैशी, अमरजीत सिंह, याकूब सिद्दीकी, राजेन्द्र शाह, जसवंत सिंह चौहान, सुमित्तर भुल्लर, अनीता शर्मा, जयेन्द्र रमोला, संजय किरोला, राजेन्द्र टंगड़िया, गौरव चौधरी, डॉ. गणेश उपाध्याय, वीरेन्द्र पोखरियाल, नीरज त्यागी, राकेश सिंह राणा, इशिता, विनोद चौहान, राकेश राजपूत, राव शेर मोहम्मद, राकेश नेगी, अरविन्द प्रधान, शोभा बिष्ट, दीपा आर्या, अनिल भास्कर, अश्वनी बहुगुणा, नरेंद्र राणा, डॉ. सोनिया आनंद, संदीप चीमा महासचिव बनाया गया है।
घोषणापत्र से लेकर अनुशासन तक अलग-अलग टीमें
कांग्रेस ने चुनावी रणनीति को धार देने के लिए अलग-अलग समितियों का भी गठन किया है। घोषणापत्र समिति की जिम्मेदारी भुवन कापड़ी को सौंपी गई है। समिति में डॉ. प्रेम बहुखंडी, गुरदीप सिंह सप्पल, सूर्यकांत धस्माना और सुजाता पॉल को सदस्य बनाया गया है। वहीं अनुशासनात्मक समिति की कमान विक्रम सिंह नेगी को दी गई है, जिनके साथ ललित फर्स्वाण, अनुपम शर्मा, हेमा पुरोहित और सी.पी. सिंह सदस्य होंगे।
एसआईआर और चार्जशीट समिति भी बनी
पार्टी ने संगठनात्मक और राजनीतिक मामलों पर नजर रखने के लिए एसआईआर समिति का गठन भी किया है। इसके अध्यक्ष मनोज रावत बनाए गए हैं, जबकि अमरेंद्र बिष्ट और एडवोकेट संदीप चमोली सदस्य होंगे। इसके अलावा चार्जशीट समिति की अध्यक्षता करण माहरा करेंगे। समिति में मनोज रावत, डॉ. प्रेम बहुखंडी और डॉ. प्रतिमा सिंह को सदस्य बनाया गया है।
चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और चुनावी रणनीति को मजबूत बनाने में जुटी है। नई समितियों के गठन को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब इन समितियों की जिम्मेदारी संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने, चुनावी घोषणापत्र तैयार करने, अनुशासन बनाए रखने और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी की रणनीति तय करने की होगी।



