विद्युत संविदा कर्मचारी फिर आंदोलन की राह पर
शासनादेश के चार माह बाद भी नहीं मिला समान कार्य के लिए समान वेतन

देहरादून: उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन (इंटक) के बैनर तले ऊर्जा निगमों में उपनल के माध्यम से कार्योजित विद्युत संविदा कर्मचारी फिर आंदोलन की राह पर हैं। संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों कार्यकारिणी सदस्यों व खंड मंडलों के पदाधिकारियों, सदस्यों की वर्चुअल बैठक आयोजित की गई बैठक में देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी , हरिद्वार, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, ऊधम सिंह नगर जनपदों के सदस्यों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के महामंत्री मनोज पंत ने कहा कि उत्तराखंड शासन के फ़रवरी,2026 को जारी शासनादेश को चार माह बीत जाने के बाद भी ऊर्जा के तीनों निगमों में समान वेतन के आदेश लागू नहीं हुए है जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। प्रदेश उपाध्यक्ष लाल सिंह गुसाईं ने कहा कि राज्य के कई विभागों में समान वेतन के आदेश लागू हो चुके है किंतु ऊर्जा के किसी भी निगम ने अबतक समान वेतन के आदेश जारी नहीं किए है जबकि तीनों निगमों उपनल के सबसे अधिक संविदा कर्मचारी कार्यरत है।
इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने कहा कि हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय बाद कैबिनेट द्वारा लिए निर्णय पर शासन द्वारा जारी आदेशों की अवमानना अधिकारियों की हठधर्मिता को उजागर करता है। विनोद कवि ने कहा कि एक तरफ़ सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में अंतिम अवसर दिए जाने माँग की गई, दूसरी ओर शासन द्वारा अब तक समस्त विभागों/निगमों के लिए अंतिम अवसर के रूप में ना तो कोई आदेश जारी किए गए हैं और न ही विभागों/निगमों द्वारा न्यायालय के आदेशों का अनुपालन किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि जानबूझकर उच्च न्यायालय के निर्देशों की अवमानना की जा रही है। संगठन द्वारा तीनों निगम प्रबंधनों से मुलाकात कर समान वेतन के आदेश लागू करने का अनुरोध किया गया परंतु सिवाय आश्वासनों के कुछ ठोस परिणाम नज़र नहीं आ रहे हैं।
इसलिए बैठक में संगठन द्वारा निर्णय लिया गया है कि संगठन शीघ्र ही प्रमुख सचिव ऊर्जा से मुलाकात करेगा और तीनों निगमों में समान वेतन के आदेश लागू किए जाने हेतु सख्त आदेश जारी करने का अनुरोध करेगा उसके पश्चात भी यदि तीनों निगमों में समान वेतन के आदेश लागू नहीं होते हैं तो संगठन कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी तीनों निगम प्रबंधनों व उत्तराखंड शासन की होगी।
बैठक में विनोद कवि (प्रदेश अध्यक्ष), लाल सिंह गुसाईं (प्रदेश उपाध्यक्ष), मनोज पंत
(प्रदेश महामंत्री), प्रेम भट्ट, कैलाश उपाध्याय, कंचन जोशी, अंकित सैनी, नरेंद्र बुड़लाकोटी रवि बिष्ट, सुनील चौहान, शीला बोरा, नीरज उनियाल, हेमलता, संगीता नेगी, वंदना, पूजा लूथरा, नीलांबर थापा, प्रियधर बेंजवाल, रोहित मिश्रा, अनिल नौटियाल, संजय काला, मनीष पेटवाल, मनीष पांडे, अखिल कार्की, अनिल भट्ट, राजेंद्र मियाँ, भक्सिस सिंह, संदीप रावत, मनोज चौधरी, सुभाष डोभाल, मनोज पांडे, रामस्वरूप, अविनाश शर्मा, दीपेंद्र भंडारी, अमर रावत इत्यादि उपस्थित रहे।



