होमस्टे योजना में भ्रष्टाचार पर जिला पर्यटन विकास अधिकारी सस्पेंड
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है
देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना होमस्टे को लेकररिश्वत मांगे जाने की बात सामने आने पर जिला पर्यटन विकास अधिकारी बृजेन्द्र पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। खास बात यह है कि परिषद ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए न केवल अधिकारी को निलंबित किया है, बल्कि पूरे प्रकरण की विभागीय जांच भी बैठा दी है।
सोशल मीडिया पर आई शिकायतों के बाद लिया एक्शन: उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार बृजेन्द्र पाण्डेय के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है। आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर लगातार प्रसारित हो रहे वीडियो और शिकायतों का संज्ञान लेने के बाद प्रथम दृष्टया अधिकारी दोषी पाए गए हैं। इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
होम-स्टे योजना पर उठे सवाल:मामला दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना से जुड़ा हुआ है। यह योजना राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को होम-स्टे विकसित करने के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
आनुदान राशि जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप: सोशल मीडिया में इसको लेकर मामला सामने आया था, जिसमें कहा गया कि अनुदान राशि जारी करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग की जा रही थी। इन आरोपों के सामने आने के बाद पर्यटन विकास परिषद हरकत में आई और मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई कर दी।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी करेंगे जांच:परिषद ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र सिंह भण्डारी को जांच अधिकारी नामित किया है। उन्हें नियमानुसार पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान आरोपों की सत्यता, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
जांच में आरोप सिद्ध होने पर हो सकती है कठोर कार्रवाई: जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
निलंबन के दौरान यहां रहेंगे अटैच: निलंबन आदेश के अनुसार बृजेन्द्र पाण्डेय निलंबन अवधि के दौरान उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्यालय देहरादून से संबद्ध रहेंगे। इस अवधि में वे बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे तथा विभाग के निर्देशों का पालन करना होगा।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें वित्तीय नियमों के तहत निर्धारित जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह भुगतान उत्तराखंड वित्तीय नियम संग्रह के प्रावधानों के अनुसार होगा।
निलंबन आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जीवन निर्वाह भत्ते का भुगतान तभी किया जाएगा, जब संबंधित अधिकारी यह प्रमाणित करेंगे कि निलंबन अवधि के दौरान वे किसी अन्य सेवा, व्यवसाय या रोजगार से जुड़े नहीं हैं। यदि वे किसी अन्य रोजगार में पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्त संदेश:पर्यटन विभाग की यह कार्रवाई कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल के वर्षों में सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार के आरोपों पर त्वरित कार्रवाई को लेकर सरकार लगातार सख्ती का संदेश देती रही है। ऐसे में केवल सोशल मीडिया पर सामने आए आरोपों के आधार पर भी विभाग द्वारा तत्काल संज्ञान लेकर निलंबन और जांच के आदेश जारी करना यह संकेत देता है कि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों को अब हल्के में नहीं लिया जा रहा है।
हालांकि निलंबन आदेश में भी यह स्पष्ट है कि यह कार्रवाई प्रथम दृष्टया उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की गई है और अंतिम निर्णय विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। अब पूरे मामले में सभी की निगाहें जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर रहेंगी। यदि जांच में सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी पर विभागीय दंडात्मक कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी संभव है। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो विभाग नियमानुसार आगे का निर्णय लेगा।



