हरिद्वार कांवड़ यात्रा: लापरवाही ले रही कांवड़ियों की जान, 48 घंटों में 6 मौतें
कांवड़ यात्रा में छोटी सी लापरवाही कांवड़ियों की जान ले रही है। पिछले दो दिन में 6 लोगों की जान जा चुकी है
हरिद्वार: सावन का महीना शुरू होते ही उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार और ऋषिकेश करोड़ों शिवभक्तों के कदमों से गुलजार हो गई है। गंगाजल लेने आने वाले कांवड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन दूसरी तरफ, दुर्घटनाओं का ग्राफ भी ऊपर जाने लगा है। सड़क हादसा, गंगा में डूबना, वाहन पलटना जैसी घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, हालांकि, यात्रा पड़ाव से जुड़े उत्तराखंड, यूपी और हरियाणा राज्य के स्थानीय प्रशासन ने हर साल की तरह सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। बावजूद 2 दिन में 6 कांवड़ियों की मौत ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बरसात में उफनती नदियां सबसे बड़ा खतरा: कांवड़ यात्रा का अधिकांश हिस्सा मॉनसून के दौरान गुजरता है। यही समय होता है जब गंगा समेत उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ रहता है। पहाड़ों में बारिश से हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा और अन्य नदियों का जलस्तर कई गुना बढ़ जाता है। कई श्रद्धालु चेतावनी के बावजूद गहरे पानी में उतर जाते हैं या सेल्फी लेने या किनारे से आगे बढ़ने के दौरान तेज बहाव का शिकार हो जाते हैं। नदी के किनारे मौजूद फिसलन भरी चट्टानें और अचानक बढ़ने वाला जलस्तर कई बार अनुभवी तैराकों के लिए भी जानलेवा साबित होता है। यही कारण है कि हर साल नदियों में कांवड़ियों के डूबने की घटनाएं प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी रहती है।
इतना ही नहीं, गंगा और उनकी सहायक नदियों में स्नान करने वाले शिव भक्त कई बार ऊंचे पुलों से भी छलांग लगाने के चक्कर में अपनी जान गवां देते हैं।
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हमारी टीम लगातार इस तरह के संवेदनशील इलाकों में तैनात है। लेकिन कई बार देखा जाता है कि लोग बहुत लापरवाही करते हैं, जिस वजह से हादसे होते हैं। हमारी तैराक दल से लेकर तमाम रेस्क्यू टीम लोगों को बचा भी रही है और समझा भी रही है।
-नवनीत भुल्लर, हरिद्वार एसएसपी
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ऋषिकेश और हरिद्वार के ये घाट माने जाते हैं संवेदनशील: हरिद्वार और ऋषिकेश में कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां हर साल अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ती है। हर की पैड़ी के आसपास मुख्य धारा के अलावा भीमगौड़ा बैराज क्षेत्र, बैराज के नीचे के हिस्से, नीलधारा, कांगड़ा घाट, प्रेमनगर आश्रम, ज्वालापुर के आसपास का क्षेत्र और चंडी पुल के नीचे का हिस्सा संवेदनशील माना जाता है।
वहीं ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के आसपास गहरे पानी वाले हिस्से, बैराज क्षेत्र, लक्ष्मण झूला और राम झूला के आसपास की धारा, शिवपुरी की ओर जाने वाले कई नदी तट और अनधिकृत स्नान स्थल बारिश के दौरान बेहद खतरनाक हो जाते हैं। प्रशासन इन क्षेत्रों को लेकर लगातार चेतावनी जारी करता है. लेकिन कई लोग बैरिकेडिंग पार कर जोखिम उठा लेते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। 31 जुलाई को भी लापरवाही के कारण चार नाबालिग कांवड़िए हरिद्वार में गंगा स्नान के दौरान बह गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
तेज रफ्तार और स्टंटबाजी, श्रद्धा पर भारी: कांवड़ यात्रा के दौरान हादसों की एक बड़ी वजह तेज गति से वाहन चलाना भी है। कई युवा कांवड़िए बाइकों और अन्य वाहनों पर चलते हैं। एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़, स्टंट करना, अचानक लेन बदलना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कई बार जानलेवा साबित होती है। रात के समय लाइट कम होने के कारण दुर्घटना का खतरा और भी बढ़ जाता है। कई मामलों में चालक थकान के बावजूद लगातार वाहन चलाते रहते हैं, जिससे वाहन पर नियंत्रण खोने की घटनाएं सामने आती हैं। हरिद्वार के बहादराबाद में 1 अगस्त को एक लोहे का गाडर गिरने से दो शिव भक्तों की मौत हो गई। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है।



