कवियों और शायरों ने गीत-ग़ज़लों से बांधा समां
बहुप्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका नवोदित प्रवाह की ओर से दीप पर्व पर काव्य गोष्ठी आयोजित

देहरादून: बहुप्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका नवोदित प्रवाह की ओर से गुरुवार को पंडितवाड़ी में दीपपर्व पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने जहां दीपोत्सव से संबंधित कविताएं सुनाई, वहीं श्रोताओं को गीत ग़ज़लों से भी आनंदित किया।
अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ बुद्धिनाथ मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित इस काव्य गोष्ठी की शुरूआत मणि अग्रवाल मणिका की मां सरस्वती की वंदना से हुई। इसके बाद ज्योत्सना शर्मा ने ‘सुबह उठे तो राम-राम, मिले किसी से राम-राम’ सुनाकर माहौल को रातभर बना दिया। वरिष्ठ कवयित्री बसंती मठपाल ने ‘चाहती हूं कि मेरे मन में हो फुलवारियां, फूलों की क्यारियां, ताकि मैं भी सो सकूं बसंत, खुशबुएं बांटू अनंत’ रचना सुनाकर वाहवाही लूटी।
वरिष्ठ कवि सोमेश्वर पांडे ने अपनी कविता ‘दीप जले उजियारा आए भाग्य का पहिया तेज गति से सफलता की नित नई ऊंचाई लाए’ से सभी कवियों की सफल जीवन की कामना की। वरिष्ठ गीतकार शिव मोहन सिंह ने अपनी कविता ‘अभी कहीं कुछ तम बाकी है, इसी बात का ग़म बाकी है, स्नेह सिक्त लौ ले आया है, अभी दीप में दम बाकी है’ से सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दी। वरिष्ठ कवि सतीश बंसल ने ‘कुछ श्वासों की सरगम की हों, कुछ सीने की धड़कन की हों, कुछ गीत तुम्हारे मन के हों कुछ गीत हमारे मन के हों’ सुनाकर समां बांध दिया।
वरिष्ठ कवयित्री मणि अग्रवाल मणिका ने अपने गीत ‘कर रही सारी दिशाएं धुंध का वितरण, ओस की चादर बनी है भोर का दर्पण’ से शिशिर ऋतु का चित्रण किया। शायर दर्द गढ़वाली ने चार मिसरे ‘दिमागी नक्सली हैं हम कोई बागी नहीं हैं हम, परिंदे हैं मगर पिंजरे के तो आदी नहीं हैं हम, तुम्हारे साथ हैं हम भी तुम्हारे दोस्त हैं हम भी, मगर इतना समझ लेना तमाशाई नहीं हैं हम’ से श्रोताओं की तालियां बटोरी। डॉ. भारती मिश्रा ने ‘उत्तराखंड की पावन भूमि यह गौरव हमारा है, जन्म लिया है यहां पर हमने उत्तराखंड हमको प्यारा है’ गीत से राज्य का गुणगान किया। सचिन चौहान ने भी अपनी शायरी से तालियां बटोरी। वरिष्ठ कवयित्री डॉली डबराल, डॉ. सुदेश ब्याला ने सुंदर कविताओं से मन मोह लिया। आखिर में अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कवि गोष्ठी को सार्थक बताते हुए पहाड़ी नागिन रचना से समां बांध दिया।



