प्रख्यात साहित्यकार डॉ. नौटियाल को मिला हिंदी साधक सम्मान
झाँसी में हिंदी साहित्य भारती की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री रविन्द्र शुक्ल ने प्रतिष्ठित हिंदी साधक सम्मान से सम्मानित किया गया

देहरादून: देहरादून के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल को बीते रविवार को झाँसी में हिंदी साहित्य भारती की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री रविन्द्र शुक्ल ने प्रतिष्ठित हिंदी साधक सम्मान से सम्मानित किया गया। दो राष्ट्रपति के हाथों नवाजे गए डॉ. नौटियाल को हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में 155 पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। हिंदी साहित्य भारती 36 देशों में हिंदी साहित्य और संस्कृति के प्रचार प्रसार में जुटी है।

बता दें कि डॉ. नौटियाल को यह सम्मान उनके द्वारा हिंदी को विश्व में प्रथम स्थान पर स्थापित करने सम्बन्धी शोध एवं उनके द्वारा लिखे गए गुणवत्तापूर्ण साहित्य के लिए दिया गया है। इनके साहित्य की गुणवत्ता इसी से सिद्ध होती है कि इनकी पुस्तकें भारत के 70 से अधिक विश्वविद्यालयों में सहायक पुस्तक / सन्दर्भ पुस्तक के रूप में चल रही हैं। डॉ. नौटियाल विश्व के एकमात्र ऐसे साहित्यकार हैं, जिनका बायो डाटा 6170 पृष्ठों का है, जिसमें उनकी 6107 उपलब्धियां दर्ज हैं।
डॉ नौटियाल ने एमए हिंदी विश्वविद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करके किया है तथा पी एच डी , डी लिट् , एम् ए अंग्रेजी साहित्य , एम् बी ए ( बैंकिंग एवं वित्त ) एल एल बी सहित 84 डिग्री /डिप्लोमा/ प्रमाण पत्र, देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं / विश्व विद्यालयों से प्राप्त किये हैं।
डॉ नौटियाल एकमात्र ऐसे साहित्यकार हैं, जिन्होंने साहित्य की लगभग सभी विधाओं पर साहित्य सृजन किया है। इतना ही नहीं इन्होंने विविध विषयों पर साहित्य सृजन किया है। इनका कुल साहित्यिक योगदान 2186 रचनाओं का है जो समतुल्यता के आधार पर 270 पुस्तक लेखन के समतुल्य है।
डॉ नौटियाल ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों / संगोष्ठियों में 744 व्याख्यान दिए हैं। उन्होंने हिंदी भाषा, साहित्य के अलावा बैंकिंग, वित्त , वाणिज्य , अर्थशास्त्र, विपणन, प्रबंधन जैसे विषयों पर 130 शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं, जिनमें अधिकांश प्रकाशित हैं।
डॉ नौटियाल को सब्जियों और फलों पर शोध करने के लिए भारत की 12 हजार शोध परियोजनाओं में से चयनित सर्वोत्तम शोध हेतु Optum – टाइम्स ऑफ़ इंडिया , आइडियाज ऑफ़ इंडिया राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड मिला है। इस शोध द्वारा डॉ. नौटियाल ने “ ऊंची खेती – ऊंची आय” नाम की संकल्पना दी है, जिससे कम से कम भूमि में खेती करके किसानों की आय में 4 से 5 गुना वृद्धि होती है। उदाहरण के लिए भिंडी का पौधा 4 से 5 फुट ऊँचाई का होता है लेकिन डॉ नौटियाल द्वारा विकसित पौधे की ऊंचाई 15 फुट की होती है, जिस पर जड़ से लेकर ऊपर तक भिन्डियाँ लगती हैं। इससे किसानों की आय में कई गुना वृद्धि होती है। इन प्रजातियों के बीज डॉ. नौटियाल ने पन्त नगर विश्वविद्यालय को दिए हैं ताकि वे इसमें और अधिक विकास करके किसानों को वितरित कर सकें।



