उत्तराखंड में सिलक्यारा टनल में हुआ भूस्खलन, अफरातफरी
उत्तरकाशी : चारधाम सड़क परियोजना के तहत यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में एक बार फिर भूस्खलन होने का मामला सामने आया है। घटना 21 अगस्त की है, जबकि जानकारी अब सामने आई है। पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर सुरंग में भूस्खलन के मलबा फैल गया। सुरंग के अंदर मलबा गिरने की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद निर्माणाधीन सुरंग की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि, सुरंग के पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब 1300 से 1500 मीटर अंदर पहाड़ी से मलबा गिरा है। घटना के बाद सुरंग के अंदर निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। हालांकि, निर्माण कंपनी ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए किसी बड़े खतरे की आशंका से इनकार किया है।
निर्माण कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, मलबा हटाने का काम जारी है। कंपनी के प्रोजेक्ट प्रबंधक श्रीराम ने बताया कि, निर्माणाधीन सुरंग में खुदाई के दौरान कहीं-कहीं मलबा गिरना सामान्य है। पोलगांव छोर से करीब 1300 मीटर अंदर कुछ मलबा गिरा है, जिसे हटाया जा रहा है। मौके पर किसी तरह की चिंताजनक स्थिति नहीं है और सुरंग में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जा रहा है।
2023 के हादसे के बाद भी नहीं थमी घटनाएं: सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नवंबर 2023 में इसी सुरंग में बड़ा हादसा हुआ था। उस समय सिलक्यारा छोर से करीब 200 मीटर अंदर भारी भूस्खलन के कारण निर्माण कार्य में लगे 41 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए थे करीब 17 दिन तक चले अभियान के बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इस घटना के बाद सुरंग की सुरक्षा और भूगर्भीय स्थिति को लेकर कई सवाल उठे थे।
मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य: करीब 4.5 किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। तकनीकी और भूगर्भीय चुनौतियों के कारण निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं हो सका। वर्ष 2024 में सुरंग को आर-पार किया गया था। वर्तमान में करीब 90 प्रतिशत सिविल कार्य पूरा होने की बात कही जा रही है। निर्माण एजेंसी का लक्ष्य मार्च 2027 तक सुरंग का निर्माण पूरा करना है। हालांकि, सुरंग के भीतर लगातार सामने आ रहे मलबा गिरने के मामलों ने निर्माण कार्य के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत को सामने ला दिया है।



