साहित्य
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कितने हैं बेलिबास दरवाजे
कितने हैं बेलिबास दरवाजे। अब कहां गमशनास दरवाजे।। छोड़कर जब से वो गया घर को। किस कदर हैं उदास दरवाजे।।…
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अंधे बहरे गूंगे लोग
ग़ज़ल अंधे गूंगे बहरे लोग। निकले कितने झूठे लोग।। ऐसे वैसे कैसे लोग। कंधे पर हैं बैठे लोग।। सबसे झुककर…
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ख़त मेरा जब पाया होगा
ग़ज़ल ख़त मेरा जब पाया होगा। वो भी तो इतराया होगा।। घर लगता है घर सा मुझको। वो शायद घर…
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सोचकर देखा बारहा ख़ुद को
ग़ज़ल सोचकर देखा बारहा खुद को। फिर किया हमने आइना खुद को।। मैकदे से निकलते देखा है। कह रहा था…
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दिल के जैसा तलाश करता हूं
दिल के जैसा तलाश करता हूं। एक बच्चा तलाश करता हूं।। जिस जगह से उतर सकूं दिल में। मैं वो…
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मामला कुछ जमा ही नहीं
ग़ज़ल मामला कुछ जमा ही नहीं। इश्क हमसे हुआ ही नहीं।। तीर नजरों के चलते रहे। कुछ किसी ने कहा…
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जूतियां सर पर रखी हैं पांव में दस्तार है
जनाब कृष्णकुमार ‘नाज़’ साहब किसी परिचय के मोहताज नहीं है। जनाब कृष्ण बिहारी नूर साहब के प्रिय शार्गिदों में एक नाज़…
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हिंदी ग़ज़ल के प्रश्न-प्रति प्रश्न: कमलेश भट्ट कमल
हाल ही में कमलेश भट्ट कमल जी की पुस्तक ‘हिंदी ग़ज़ल के प्रश्न-प्रतिप्रश्न’ प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक से पूर्व…
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आंख अपनी खोलकर भी सो रहा है आदमी
क़िताबों की दुनिया में आपको आज मैं एक ऐसे शायर से मिलवा रहा हूँ जो मुझे अज़ीज़ ही नहीं, मेरे…
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धूप से होकर गुज़रती है
धूप से होकर गुज़रती है। ठंड में कितना सिहरती है।। ज़िन्दगी देखो हमारी भी। सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती है।। आँख पर…
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